सरल तथा महत्त्वपूर्ण नोट्स परीक्षा दसवीं टर्म 2 अप्रैल 2022

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सरल तथा महत्वपूर्ण नोट्स, विषय हिंदी, दसवीं कक्षा टर्म 2  (अप्रैल 2022)

तैयारकर्ता:    डॉ० सुमन सचदेवा, हिंदी मिस्ट्रेस, सरकारी हाई स्कूल, मंडी हरजी राम (लड़के) मलोट, ज़िला श्रीमुक्तसर साहिब

संयोजक:     दीपक कुमार, हिंदी मास्टर, समिस मानवाला, बठिंडा

कुल अंक  : 38+ 2 सुंदर लिखाई = 40
भाग  क
प्रश्न 1  सप्रसंग व्याख्या (1*5=5)
हम राज्य लिए मरते हैं (मैथिलीशरण गुप्त)
हम राज्य लिए मरते हैं।
सच्चा राज्य परंतु हमारे कर्षक ही करते हैं।
जिन के खेतों में है अन्न,
कौन अधिक उनसे संपन्न ?
पत्नी-सहित विचरते हैं वे,
भाव वैभव भरते हैं
हम राज्य लिए मरते हैं ।
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘हिंदी पुस्तक-10’ में संकलित राष्ट्रकवि ‘मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा रचित  ‘हम राज्य लिए मरते हैं’ से ली गयी हैं । प्रस्तुत कविता में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला किसानों के सादे और शांतिपूर्ण जीवन की प्रशंसा कर रही है ।
व्याख्या: उर्मिला कहती है कि हम राज परिवार के लोग राज्य कलह के कारण दुःखी हैं। जबकि वास्तव में सच्चा राज्य हमारे किसान करते हैं। वे स्वयं अपने खेतों में अन्न उत्पन्न करते हैं। इसलिए किसानों से धनवान कोई नहीं। वह अपनी पत्नी संग जीवन यापन करते हैं। जबकि हम गृह कलेश के कारण भी वियोग सह रहे हैं। अतः किसान हम से अधिक सुखी हैं।

वे गोधन के धनी उदार,
उनको सुलभ सुधा की धार,
सहनशीलता के आगर वे श्रम सागर तरते हैं।
हम राज्य लिए मरते हैं।

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘हिंदी पुस्तक-10’ में संकलित राष्ट्रकवि ‘मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा रचित‘हम राज्य लिए मरते हैं’ से अवतरित है। प्रस्तुत कविता में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला किसानों के सादे और शांतिपूर्ण जीवन की प्रशंसा कर रही है।
व्याख्या: उर्मिला किसानों की प्रशंसा करते हुए कहती है कि किसानों के पास अमृत की धारा के समान गाय का दूध सहज ही मिल जाता है। किसान सहनशीलता की मूर्ति है। वे सदैव परिश्रम करने में विश्वास रखते हैं। जबकि हम राज परिवार के सदस्य राज्य कलह के कारण दुःखी हैं।

यदि वे करें,
उचित है गर्व,
बात बात में उत्सव-पर्व,
हमसे प्रहरी रक्षक जिनके,वे किस से डरते हैं?
हम राज्य लिए मरते हैं ।

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘हिंदी पुस्तक-10’ में संकलित राष्ट्रकवि ‘मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा रचित ‘हम राज्य लिए मरते हैं’ से ली गयी हैं । प्रस्तुत कविता में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला किसानों के सादे और शांतिपूर्ण जीवन की प्रशंसा कर रही है।
व्याख्या: उर्मिला आगे कहती है कि यदि किसान अपने ऊपर गर्व या मान करते हैं तो इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है। उनका ऐसा सोचना बिल्कुल उचित है। वह छोटी-छोटी बातों में खुशी का मौका तलाश लेते हैं। वह प्रतिदिन उत्सव या त्योहार मनाते हैं। जब हम जैसे लोग उनके रक्षक हैं तो उन्हें किसी से भयभीत होने की ज़रुरत  नहीं। जबकि हम राज्य के लिए मरते हैं।

करके मीन मेख सब ओर,
किया करें बुध वाद कठोर,
शाखामयी बुद्धि तजकर वे मूल धर्म धरते हैं।
हम राज्य लिए मरते हैं ।

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘हिंदी पुस्तक-10’ में संकलित राष्ट्रकवि ‘मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा रचित  ‘हम राज्य लिए मरते हैं’ से अवतरित है। प्रस्तुत कविता में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला किसानों के सादे और शांतिपूर्ण जीवन की प्रशंसा कर रही है।
व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियों में उर्मिला किसानों के सरल व सादे जीवन की ओर संकेत करते हुए कहती है कि हम विद्वान लोग तो छोटी-छोटी बात पर बहस करते हैं। किसान व्यर्थ के वाद-विवाद को त्याग कर धर्म के मूल सिद्धांतों को अपनाते हैं।  हम राजवंशी राज्य कलह के कारण दुःखी हैं।

होते कहीं वही हम लोग,
कौन भोगता फिर ये भोग ?
उन्हीं अन्नदाता के सुख आज दुःख हरते हैं।
हम राज्य लिए मरते हैं।

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक ‘हिंदी पुस्तक-10’ में संकलित राष्ट्रकवि ‘मैथिलीशरण गुप्त’ द्वारा रचित ‘हम राज्य लिए मरते हैं’ से अवतरित है। प्रस्तुत कविता में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला किसानों के सादे और शांतिपूर्ण जीवन की प्रशंसा कर रही है।
व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियों में उर्मिला के मन की पीड़ा उजागर होती है। उर्मिला कहती है कि अगर हम राजवंशी न होकर किसान होते तो हमें राज्य कलह के कारण दु:ख न सहना पड़ता अर्थात् हम पति-पत्नी में भी वियोग  न पड़ता। उनके सुखों को देखकर हमारे दुःख दूर हो जाते हैं। लेकिन हम फिर भी राज्य कलह के कारण दुःख भोगते हैं।

गाता खग ( सुमित्रानंदन पन्त)
गाता खग प्रातः उठकर  सुंदर, सुखमय जग-जीवन!
गाता खग संध्या -तट पर,  मंगल, मधुमय जग-जीवन।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक-10 में संकलित सुमित्रानन्दन पंत की कविता ‘गाता खग’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के विविध स्वरूपों का वर्णन किया है।
व्याख्या- कवि कहता है कि सुबह के समय पक्षी उठकर मधुर गीत गाता है और संसार के लोगों के सुखी एवं सुंदर जीवन की कामना करता है। संध्या यानि शाम के समय वह कल्याणकारी और मधुमय जीवन के गीत गाता है।

कहती अपलक तरावलि,  अपनी आँखों का अनुभव,
अवलोक आँख आँसू की,  भर आतीं आँखें नीरव!

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक-10 में संकलित सुमित्रानन्दन पंत की कविता ‘गाता खग’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के विविध स्वरूपों का वर्णन किया है।
व्याख्या- कवि कहता है कि तारों की पंक्तियाँ अपनी आँखों से देखा हुआ अनुभव बताती हैं। वे मानव के दुःख और आँसू देखकर चुपचाप ओस के रूप में मानो स्वयं भी आँसू बहाती हैं।

हँसमुख प्रसून सिखलाते, पल भर है, जो हँस पाओ,
अपने उर की सौरभ से,  जग का आँगन भर जाओ।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित सुमित्रानन्दन पंत की कविता ‘गाता खग’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के विविध स्वरूपों का वर्णन किया है।

व्याख्या- कवि कहता है कि मुस्कुराते हुए फूल मानव को यह सन्देश देते हैं कि ये जीवन बहुत छोटा है और हमें सदा मुस्कुराते रहना चाहिए। वह हमें यह सन्देश देते हैं कि हमें अपने दिल में मौजूद अच्छे गुणों की महक से संसार का आँगन भर देना चाहिए अर्थात सभी को खुशियाँ बाँटनी चाहिए ।

उठ-उठ लहरें कहतीं यह, हम कूल विलोक न पाएँ,
पर इस उमंग में बह-बह, नित आगे बढ़ती जाएँ।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित सुमित्रानन्दन पंत की कविता ‘गाता खग’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के विविध स्वरूपों के माध्यम से मनुष्य को जीवन में आशावादी बनने की प्रेरणा दी है।

व्याख्या- कवि कहता है कि पानी की लहरें उठ-उठकर मानव को बिना किसी डर के आगे बढ़ते रहने का संदेश देती हैं। चाहे पानी की लहरों को किनारा नहीं दिखता पर वे फिर भी इसी आशा और विश्वास के साथ आगे बढ़ती जाती हैं कि उन्हें किनारा अवश्य मिलेगा, वे अपने लक्षय किनारे को अवश्य पा लेंगी। हमें भी सदा अपनी मंज़िल की तरफ़ बढ़ते रहना चाहिए ।

कँप कँप हिलोर रह जाती, रे मिलता नहीं किनारा।
बुदबुद विलीन हो चुपके, पा जाता आशय सारा। 

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित सुमित्रानन्दन पंत की कविता ‘गाता खग’ में से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने प्रकृति के विविध स्वरूपों के माध्यम से मनुष्य को जीवन का अर्थ समझाया है ।

व्याख्या- कवि कहता है कि नदी की लहरें काँपती-काँपती ही रह जाती हैं परंतु उन सभी को किनारा तो नहीं मिल पाता। इधर पानी का बुलबुला चुपचाप पानी में ही विलीन होकर जीवन का सारा उद्देश्य समझ जाता है कि यह जीवन नश्वर है। यहीं उत्पन्न होना है और यहीं समाप्त होना है। अर्थात मृत्यु ही मानव के जीवन का सार है ।

जड़ की मुसकान (हरिवंश राय बच्चन)
एक दिन तने ने कहा था
जड़ ? जड़ तो जड़ ही है,
जीवन से सदा डरी रही है,
और यही है उसका सारा इतिहास
कि ज़मीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही है
लेकिन मैं ज़मीन से ऊपर उठा,
बाहर निकला,
बढ़ा हूँ
मज़बूत बना हूँ,
इसी से तो तना हूँ।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित श्री हरिवंश राय बच्चन की कविता ‘जड़ की मुस्कान’ में से ली गई हैं। इस कविता के माध्यम से कवि व्यक्ति को अपने मूल आधार को सदा याद रखने की प्रेरणा देते हैं।

व्याख्या- एक दिन तने ने जड़ को सम्बोधित करते हुए कहा कि तू तो जड़ है। ज़िन्दगी से सदा डरी रही है और तेरा यही इतिहास है कि तू धरती के अन्दर मुँह छिपाए पड़ी है। तना अपने आप को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहता है कि मैं ज़मीन से ऊपर उठा, बाहर निकला, बढ़ा हूँ, मज़बूत भी हूँ, इसलिए आज मैं तनकर खड़ा हूँ।

एक दिन डालों ने भी कहा था,
तना?
किस बात पर है तना?
जहाँ बिठाल दिया गया था वहीं पर है बना;
प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है,
खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है;
लेकिन हम तने से फूटी,
दिशा-दिशा में गई
ऊपर उठीं,
नीचे आई
हर हवा के लिए दोल बनीं, लहराई,
इसी से तो डाल कहलाई।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित श्री हरिवंश राय बच्चन की कविता ‘जड़ की मुस्कान’ में से ली गई हैं। इस कविता के माध्यम से कवि व्यक्ति को अपने मूल आधार को सदा याद रखने की प्रेरणा देते हैं।

व्याख्या- एक दिन तने से ही निकली हुई डालियों ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए तने को कहा कि तू किस बात का अभिमान कर रहा है। तुझे जहाँ बिठा दिया गया तू वहीं पर टिका रहता है। इस विकासशील युग में सभी आगे बढ़ते हैं लेकिन तू तो खा-पीकर और मोटापे से भरकर यही पड़ा रहता है । कभी इधर-उधर नहीं डोलता अर्थात् तूने कभी हवा में झूलने का, हिलने का आनन्द ही नहीं लिया। हम तुझ से ही निकली हैं, आज हवा के साथ-साथ झूलती हैं,  कभी ऊपर तो कभी नीचे लहराती हैं, इसीलिए हमारा नाम डाली है।

एक दिन पत्तियों ने भी कहा था,
डाल?
डाल में क्या है कमाल?
माना वह झूमी, झुकी, डोली है
ध्वनि-प्रधान दुनिया में
एक शब्द भी वह कभी बोली है ?
लेकिन हम हर-हर स्वर करती हैं
मर्मर स्वर मर्मभरा भरती हैं,
नूतन हर वर्ष हुई,
पतझर में झर
बहार-फूट फिर छहरती हैं,
विथकित-चित्त पंथी का
शाप-ताप हरती हैं।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित श्री हरिवंश राय बच्चन की कविता ‘जड़ की मुस्कान’ में से ली गई हैं। इस कविता के माध्यम से कवि व्यक्ति को अपने मूल आधार को सदा याद रखने की प्रेरणा देते हैं।
व्याख्या- इन पंक्तियों में डाली पर उसी की पत्तियाँ व्यंग्य करते हुए कहती हैं कि तुम चाहे हवा में डोलती हो पर इस ध्वनि प्रधान दुनिया में तुम एक शब्द नहीं बोल सकती। हर-हर की आवाज़ अर्थात पत्तों के सरसराने की आवाज़ तो हम हीं करती हैं। हम हर पतझड़ में झड़ कर बहार के मौसम में फिर से नए रुप में उभर कर आती हैं। पथिकों के मन के दु:खों और उनके तन की तपन को दूर करती हैं । ऐसा सामर्थ्य तुम में नहीं है ।

एक दिन फूलों ने भी कहा था,
पत्तियाँ ?
पत्तियों ने क्या किया ?
संख्या के बल पर बस डालों को छाप लिया,
डालों के बल पर ही चल-चपल रही हैं,
हवाओं के बल पर ही मचल रही हैं
लेकिन हम अपने से खुले, खिले, फूले हैं—
रंग लिए, रस लिए, पराग लिए—
हमारी यश-गंध दूर-दूर-दूर फैली हैं,
भ्रमरों ने आकर हमारे गुन गाए हैं,
हम पर बौराए हैं।
सबकी सुन पाई है,
जड़ मुसकराई है।

प्रसंग- प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिन्दी की पाठ्य पुस्तक में संकलित श्री हरिवंश राय बच्चन की कविता ‘जड़ की मुस्कान’ में से ली गई हैं। इस कविता के माध्यम से कवि व्यक्ति को अपने मूल आधार को सदा याद रखने की प्रेरणा देते हैं ।
व्याख्या- फूल अपने आप को पत्तियों से श्रेष्ठ सिद्ध करते हुए पत्तियों पर व्यंग्य करते कहते हैं कि चाहे पत्तियों ने डालियों को भर दिया परन्तु वे डालियों के सहारे ही खड़ी हैं तथा हवा के सहारे झूमती हैं। परन्तु हम फूल तो स्वयं खिले हैं ,फूले हैं, रस और पराग से भरे हैं । हमारी सुगंध की प्रशंसा दूर-दूर तक फैली है। भँवरे आकर उनका गुणगान करते है। हम पर दीवाने हैं और पागलों की तरह हम पर अपना प्यार बरसाते हैं। जड़ उन सबकी बातें सुनकर मुस्कुरा देती है। क्योंकि जड़ को पता है कि इन सबका अस्तित्व उसके कारण ही है। परन्तु सब अपने घमण्ड में चूर हैं और अपने आप को ही श्रेष्ठ सिद्ध करना चाहते है।

प्रश्न 2    तीन चार पंक्तियों वाले प्रश्न (2*2 =4 )
माँ का कमरा ( लघुकथा )
प्रश्न:  बेटे ने पत्र में अपनी माँ बसंती को क्या लिखा ?
उत्तर: बेटे ने अपनी माँ को पत्र में लिखा था कि उसकी तरक्की हो गई है। उसकी कंपनी ने उसे रहने के लिए बहुत  कोठी दे दी है। अब वह रहने के लिए उसके पास शहर में आ जाए। उसे किसी तरह की कोई तकलीफ़ नहीं होगी।

प्रश्न: पड़ोसन ने बसंती को क्या समझाया?
उत्तर: पड़ोसन ने बसंती को समझाया कि उसे बेटे के पास रहने के लिए नहीं जाना चाहिए। शहर में रहने वाले बेटे बुज़ुर्गों को अपने पास बुला तो लेते हैं लेकिन उन्हें सम्मान नहीं देते। उनसे नौकरों वाले काम करवाते हैं ।

प्रश्न: बसंती क्या सोचकर अपने बेटे के साथ आ गई ?
उत्तर: बसंती पहले तो ड़र रही थी कि वह अपने बेटे के पास जाए या न जाए । लेकिन जब उसका बेटा कार लेकर उसे लेने आ गया तो वह उसके साथ यह सोच कर जाने को तैयार हो गई कि जो होगा देखा जाएगा।

प्रश्न: बसंती के कमरे में कौन कौन सा सामान था?
उत्तर:  बसंती के कमरे में डबल बैड लगा हुआ था । बैड पर नर्म गद्दे बिछे हुए थे। एक टीवी , टेपरिकार्डर और दो कुर्सियाँ पड़ी थी। उसे अपना कमरा बहुत सुंदर लगा था।

प्रश्न: बसंती की आँखों में आँसू क्यों आ गए ?
उत्तर: बसंती अपने बेटे के पास शहर जाते समय ड़र रही थी कि उसका बेटा उसके साथ अच्छा व्यवहार नही करेगा। लेकिन इसके विपरीत उसके बेटे ने जब उसे इतना सम्मान दिया तो बसंती की आँखों में खुशी के आँसू आ गये।

प्रश्नमाँ का कमरालघुकथा का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: ‘माँ का कमरा’ एक उद्देश्यपूर्ण लघुकथा है। आजकल अनेक पुत्र अपने बुज़ुर्ग माता-पिता से अच्छा व्यवहार नही करते। उनसे नौकरों की तरह काम करवाते हैं। लेकिन अनेक ऐसे युवक भी है जो अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं। जैसे बसंती के साथ उसके पुत्र ने बहुत अच्छा व्यवहार किया। अतः यह एक आशावादी कहानी है जिसमें लेखक का उद्देश्य यह बताना है कि हमें अपने बूढ़े माँ – बाप की सेवा करनी चाहिए ।

अहसास  (लघुकथा )

प्रश्न : दिवाकर की नये स्कूल में किसने मदद की ?
उत्तर: दिवाकर गाँव से नया-नया शहर में आया था। यहाँ शहर के स्कूल में अपाहिज होने के कारण वह अपने को अधूरा समझ रहा था। ऐसे समय में उसकी अध्यापिका नीरू ने अपने प्रेम भरे व्यवहार से उसकी मदद की।

प्रश्न : दिवाकर बेंच पर बैठकर क्या सोच रहा था?
उत्तर : रोज़ गार्डन में जब सभी बच्चे खेल कूद रहे थे और झूला झूल रहे थे, उस समय बेंच पर बैठा दिवाकर अपने पुराने दिनों को याद कर रहा था जब उसकी दोनो टांगे ठीक थी। वह उन यादों में खोया था कि दो साल पहले जब वह अपनी मौसी के घर दिल्ली गया था तो उसने वहाँ फन सिटी में कितना मज़ा किया था । यही विचार उसके मन में घूम रहे थे।

प्रश्न: साँप को देखकर दिवाकर क्यों नहीं ड़रा ?
उत्तर : शहर में आने से पहले दिवाकर गाँव के स्कूल में पढ़ता था । वहाँ उसने खेतों में कई बार साँप और अन्य जानवरों को देखा था। उसके लिए साँप को देखना ड़र वाली बात नहीं थी । वह साहसी और निड़र बालक था। इसलिए वह साँप को देखकर नहीं ड़रा ।

प्रश्न: दिवाकर ने अचानक साँप को सामने देखकर क्या किया ?
उत्तर: दिवाकर अचानक साँप को देखकर बिल्कुल भी नहीं घबराया जबकि अन्य बच्चे डर के मारे काँप रहे थे। दिवाकर ने बहुत धीरज के साथ काम किया। उसने बिना ड़रे और घबराए अपने बैसाखी से साँप को उठाकर दूर फेंक दिया।

प्रश्न: दिवाकर को क्यों पुरस्कृत किया गया?
उत्तर: दिवाकर को उसकी वीरता, साहस एवं सूझबूझ के लिए पुरस्कृत किया गया ।अपाहिज होते हुए भी उसने साँप को अपनी बैसाखी से उठाकर दूर फेंक दिया ।इस तरह से उसने सभी बच्चों की साँप से जान बचाई । इसलिए प्रातः कालीन सभा में प्राचार्य महोदय ने उसे सम्मानित किया।

प्रश्न:अहसासलघुकथा का क्या उद्देश्य है?
उत्तर: ‘ अहसास’ एक प्रेरणादायक लघुकथा है। इसमें लेखिका ने एक बालक को शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हुए दिखाया है। कहानी में दिवाकर अपाहिज होते हुए भी  बच्चों को साँप से बचाता है। दिवाकर को जब प्रातः कालीन सभा में प्राचार्य द्वारा सम्मान मिलता है तो उसे बहुत खुशी का अहसास होता है ।अतः हमें शारीरिक अपंगता को किसी की कमी नही समझना चाहिए।

दो कलाकार  ( कहानी )

प्रश्न: अरुणा के समाज सेवा के कार्यों के बारे में लिखें ।
उत्तर: अरुणा एक सच्ची समाज सेविका है। वह छात्रावास में रहते हुए सदा समाज सेवा के कार्यों में जुटी रहती है। वह वहाँ रहकर चपरासियों, दाइयों आदि के बच्चों को मुफ्त पढ़ाती है। बाढ़ पीड़ितों की सेवा के लिए बहुत दिन छात्रावास से बाहर रहती है। फुलिया के बीमार बच्चे की सेवा में दिन रात एक कर देती है। भिखारिन के मरने के बाद वह उसके दोनों बच्चों का पालन पोषण करती है।

प्रश्न: मरी हुई भिखारिन और उसके दोनों बच्चों को उसके सूखे शरीर से चिपक कर रोते देख चित्रा ने क्या किया?

उत्तर : चित्रा जब वापस लौट रही थी तो उसने देखा कि भिखारिन मर चुकी है और उसके दोनो बच्चे उसके सूखे शरीर से लिपट कर रो रहे हैं। चित्रा के संवेदनशील मन से रहा नहीं गया। उसके अंदर का कलाकार जाग उठा। वह वहीं रुक गई और उस दृश्य को उसने कागज़ पर उतार कर एक चित्र का रूप दे दिया ।

प्रश्न: चित्रा की हॉस्टल से विदाई के समय अरुणा क्यों नहीं पहुँच सकी?
उत्तर: जब चित्रा ने आकर अरुणा को मरी हुई भिखारिन और उसके रोते हुए बच्चों के बारे में बताया तो अरुणा यह सुनकर स्वयं को रोक नहीं पाई और वह उसी समय उस भिखारिन के बच्चों के पास पहुँच गयी। उन बच्चों को संभालने में व्यस्त होने के कारण ही वह चित्रा की विदाई के समय वहाँ पर पहुँच नहीं पाई ।

प्रश्न:  प्रदर्शनी में अरुणा के साथ कौन से बच्चे थे ?
उत्तर: प्रदर्शनी में अरुणा के साथ जो दो बच्चे थे, वे उस मरी हुई भिखारिन के वही बच्चे थे जो अपनी माँ के मरने के बाद बेसहारा रह गये थे। जिन बच्चों का चित्र बनाकर चित्रा ने प्रसिद्धि प्राप्त की थी, उन्हीं बच्चों को अरुणा ने माँ की तरह पाल पोस कर बड़ा किया था। प्रदर्शनी में अरुणा के साथ वही दोनो बच्चे  थे।

देश के दुश्मन  ( एकांकी )

प्रश्न: सुमित्रा क्यों कहती है कि अब उसका ह्रदय इतना दुर्बल हो चुका है कि जरा सी भी आशंका से काँप उठता है।
उत्तर: पति के बलिदान को तो सुमित्रा ने दिल पर पत्थर रखकर सहन कर लिया था लेकिन अब उसकी देह जर्जर हो चुकी है। उसकी हिम्मत टूट चुकी है। वह अपने इकलौते पुत्र को खोना नही चाहती। अब उसका दिल इतना दुर्बल हो चुका है कि जरा सी आशंका से भी काँप उठता है।

प्रश्न: नीलम जयदेव से मान भरी मुद्रा में क्या कहती है?
उत्तर: नीलम जयदेव से मान भरी मुद्रा में कहती है, “मेरी तो राह देखते-देखते आँखें पथरा गई हैं, पर जनाब को मेरी परवाह तक नहीं कि किसी के दिल पर क्या बीत रही है।”

प्रश्न:  जयदेव को गुप्तचरों से क्या समाचार मिला ?
उत्तर: जयदेव को गुप्तचरों से समाचार मिला कि रात के अंधेरे में पुलिस पीकेट से एक डेढ़ मील दूर दक्षिण की तरफ से कुछ लोग बॉर्डर पार करने वाले हैं। ऐसा शक है कि वे सोना स्मगल करके ला रहे हैं।

प्रश्न: जयदेव ने अपनी छुट्टी कैंसिल क्यों करा दी थी ?
उत्तर: जयदेव को गुप्तचरों से समाचार मिला कि रात के अँधेरे में पुलिस पीकेट से एक डेढ़ मील दक्षिण की तरफ से कुछ लोग सोना स्मगल करके बॉर्डर पार करने वाले हैं। जयदेव तस्करों को पकड़ने का यह अवसर हाथ से खोना नहीं चाहता था। इसलिए उसने अपनी छुट्टी कैंसिल करवा दी ।

प्रश्न: नीलम क्यों चाहती थी कि डी.सी. दोपहर के बाद जयदेव को मिलने  आए?
उत्तर:  जयदेव अभी वापस लौटा था और वह बहुत थका हुआ था। इसलिए नीलम चाहती थी कि वह थोड़ा आराम कर ले ।उसके बाद ही डी. सी. उसे मिलने आए।

प्रश्न : एकांकी में डी.सी. के  किस संवाद से पता चलता है कि डी.सी. और जयदेव में घनिष्ठता थी ?
उत्तर : डी.सी. जब कहता है, “सर वर बैठा होगा ऑफिस की कुर्सी में। खबरदार ! जो यहाँ सर सर कहा। मैं वही तुम्हारा बचपन का दोस्त और क्लासमेट हूँ जिससे बिना हाथापाई किए रोटी हजम नहीं होती थी।” डीसी के इस संवाद से उनकी जयदेव के साथ गहरी घनिष्ठता का पता चलता है।

प्रश्न : डी. सी. आकर सुमित्रा को क्या खुशखबरी देता है?
उत्तर : डी सी आकर सुमित्रा को खुशखबरी देते हैं कि जयदेव की वीरता और साहस के कारण उसे सम्मानित किया जाएगा। गवर्नर साहब की तरफ से दस हज़ार रुपये की इनाम राशि भी दी जाएगी ।

प्रश्न: जयदेव इनाम से मिलने वाली राशि के विषय में क्या घोषणा करवाना चाहता है ?
उत्तर: जयदेव इनाम में मिलने वाली राशि के विषय में यह घोषणा करना चाहता है कि उसकी इनाम राशि शहीद हुए अफसरों की विधवाओं को आधी -आधी बाँट दी जाए ।

सदाचार का तावीज़ ( निबंध)
प्रश्न: दरबारियों ने भ्रष्टाचार न दिखने का क्या कारण बताया?
उत्तर : दरबारियों ने भ्रष्टाचार न दिखने का एक कारण यह बताया कि वह बहुत बारीक होता है। उनकी आँखें महाराजा की विराटता को देखने की इतनी अधिक अभ्यस्त हो गई है उन्हें कोई बारीक चीज़ दिखाई नहीं देती । उनकी आँखों में तो सदा महाराज की सूरत बसी रहती है। इसलिए भ्रष्टाचार दिखाई नहीं देता।

प्रश्न: राजा ने भ्रष्टाचार की तुलना ईश्वर से क्यों की?
उत्तर:  राजा ने भ्रष्टाचार की तुलना ईश्वर से इसलिए की क्योंकि भ्रष्टाचार अति सूक्ष्म है, वह दिखाई नहीं देता और वह  सर्वव्यापी है। ये सब गुण एवं विशेषताएँ तो ईश्वर में ही होती हैं। ईश्वर भी सर्वव्यापी होता है। वह किसी को दिखाई नहीं देता। इसलिए राजा ने भ्रष्टाचार की तुलना ईश्वर से की।

प्रश्न: राजा का स्वास्थ्य क्यों बिगड़ता जा रहा था?
उत्तर: राजा के राज्य में भ्रष्टाचार बहुत तेज़ी से फैल रहा था। राजा को वह कहीं दिखाई भी नहीं दे रहा था। उसके दरबारियों को भी भ्रष्टाचार कहीं दिखाई नहीं दिया । इस तरह भ्रष्टाचार के फैलते जाने के कारण और इसे दूर करने का कोई हल नज़र न आने के कारण राजा का स्वास्थ्य बिगड़ता जा रहा था।

प्रश्न: साधु ने सदाचार और भ्रष्टाचार के बारे में क्या कहा?
उत्तर : साधु ने कहा कि भ्रष्टाचार और सदाचार दोनों व्यक्ति की आत्मा में होते हैं। वे बाहर से आने वाली वस्तु नहीं है। ईश्वर जब मनुष्य को बनाता है तब वह किसी आत्मा में ईमान की और किसी आत्मा में बेईमानी की कला को फिट कर देता है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी आत्मा के अनुसार ही कार्य करता है। इसे आत्मा की पुकार कहा जाता है ।

प्रश्न: तावीज़ किस लिए बनवाये गये थे?

उत्तर:  भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए  तावीज़ बनाए गये थे। अपने दरबारियों के कहने पर राजा साधु  से तावीज़ बनवाकर अपने कर्मचारियों की भुजाओं पर बंधवाना चाहता था जिससे वे सभी सदाचारी बन जाएँ। पहले इसका कुत्ते पर प्रयोग किया गया था। तावीज़ गले में बाँध देने से कुत्ता भी रोटी नहीं चुराता। इसी तरह व्यक्ति की भुजा में तावीज़ बाँधने से भ्रष्टाचार नहीं रहता।

प्रश्न: महीने के आखिरी दिन तावीज़ में से कौन से स्वर निकल रहे थे ?
उत्तर: महीने के आखिरी दिन राजा वेश बदलकर एक कर्मचारी के पास काम करवाने गया। उसे पाँच रुपये का नोट दिखाया। उस कर्मचारी ने उस नोट को उसी समय वहीं पकड़ लिया। राजा ने कर्मचारी को पकड़कर पूछा कि क्या उसने तावीज़ नहीं बाँधा है। उसने तावीज़ बाँधा हुआ था। जब राजा ने तावीज़ पर कान लगा कर सुना तो तावीज से आवाज़ आ रही थी कि ‘आज तो इकतीस तारीख है, आज तो ले लो ।’

ठेले पर हिमालय ( निबंध )

प्रश्न: लेखक को ऐसा क्यों लगा जैसे वे ठगे गये हैं?
उत्तर:  लेखक और उनके दोस्त मन में बहुत उत्साह लेकर बर्फ को निकट से देखने के लिए बड़े कठिन रास्तों से गुज़रते हुए कौसानी गए थे । जब कौसानी के बस अड्डे पर बस रुकी तो उन्होंने देखा कि एक बहुत ही उजड़ा सा गाँव था। बर्फ का कहीं नाम निशान नहीं था। तब लेखक को लगा कि जैसे वे ठगे गए हैं।

प्रश्न: सबसे पहले बर्फ दिखाई देने का वर्णन लेखक ने कैसे किया है?
उत्तर:  लेखक को बर्फ बादलों के टुकड़े जैसी लगी थी जिसमें सफेद, रुपहला और हल्का नीला रंग शोभा दे रहा था। उसे ऐसा लगा जैसे घाटी के पार हिमालय पर्वत को बर्फ ने ढंक रखा हो। उसे ऐसे लग रहा था जैसे कोई बाल स्वभाव वाला शिखर बादलों की खिड़की से झाँक रहा हो।

प्रश्न: खानसामे ने सब मित्रों को खुशकिस्मत क्यों कहा?
उत्तर: खानसामे ने सब मित्रों को खुशकिस्मत इसलिए कहा क्योंकि उन्हें वहाँ आते पहले ही दिन बर्फ के दर्शन हो गए थे। उससे पहले 14 टूरिस्ट वहाँ आकर पूरा हफ्ता भर रुके , परंतु उन्हें बादलों के कारण बर्फ दिखाई नहीं दी।

प्रश्न: सूरज के डूबने पर सब गुमसुम क्यों हो गए थे ?
उत्तर: सूरज के डूबने पर सब गुमसुम इसलिए हो गए थे क्योंकि सूरज डूबने के साथ ही उनकी हिम दर्शन की

इच्छाएँ और आशाएँ धूमिल हो गई थी। जिस हिम दर्शन की आशा में लेखक अपने मित्रों के साथ बहुत समय से टकटकी लगाकर देख रहे थे, वे उस से वंचित रह गए थे।

प्रश्न: लेखक ने बैजनाथ पहुंचकर हिमालय से किस रूप में भेंट की ?
उत्तर : लेखक ने बैजनाथ पहुँचकर देखा कि गोमती निरंतर प्रवाहित हो रही थी। गोमती की उज्ज्वल जल राशि में हिमालय की बर्फीली चोटियों की छाया तैर रही थी। लेखक ने नदी के इस जल में तैरते हुए हिमालय से भेंट की।

गुरु नानक देव जी ( निबंध )

प्रश्न: गुरु नानक देव जी के जन्म के संबंध में भाई गुरदास जी ने कौन सी तुक लिखी ?
उत्तर: भाई गुरदास जी ने गुरु नानक देव जी के जन्म के संबंध में लिखा था :-
‘सुनी पुकार दातार प्रभु
गुरु नानक जगि माहिं पठाया’

प्रश्न : गुरु नानक देव जी पढ़ने के लिए किन- किन के पास गए थे?
उत्तर : गुरु नानक देव जी को सबसे पहले पढ़ने के लिए पांडे के पास भेजा गया। मौलवी सैयद हुसैन तथा पंडित बृज नाथ जी से भी इन्होंने शिक्षा प्राप्त की थी। वहाँ से  इन्होंने हिंदी, पंजाबी, फारसी और संस्कृत आदि भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया ।

प्रश्न: साधुओं की संगति में रहकर गुरु नानक देव जी ने कौन-कौन से  ज्ञान प्राप्त किए ?
उत्तर: साधुओं की संगति में रहकर गुरु नानक देव जी ने भारतीय धर्म का ज्ञान प्राप्त किया। आपने विभिन्न संप्रदायों, धर्म ग्रंथों और शास्त्रों का ज्ञान भी साधुओं की संगति में रहकर प्राप्त किया । राग विद्या भी आपने साधुओं की संगति में ही प्राप्त की थी।

प्रश्न: गुरु नानक देव जी ने कौन- कौन से महत्वपूर्ण शहरों की यात्रा की ?
उत्तर: अपनी यात्राओं में गुरु नानक देव जी ने आसाम, लंका, ताशकंद मक्का-मदीना आदि शहरों की यात्रा की । आपने हिमालय पर स्थित योगियों के केंद्रों की भी यात्रा की। तथा सबको सही धर्म व सही मार्ग दिखाया।

प्रश्न: गुरु नानक देव जी ने भारतीय जनता को किन बुराइयों से स्वतंत्र किया?
उत्तर:  गुरु नानक देव जी के समय में भारतीय जनता धार्मिक आडंबरों में लगी हुई थी। आपने उस समय के हिंदू व मुसलमानों को इन रूढ़ियों व आडंबरों से मुक्त करवाने के लिए उपदेश दिए तथा उन्हें सही रास्ता दिखाया।

प्रश्न: गुरु नानक देव जी की रचनाओं के नाम लिखें।
उत्तर:  गुरु नानक देव जी की रचनाएं जपुजी साहिब , आसा दी वार, सिद्ध गोष्ठी, पट्टी ,दखनी ओंकार , पहरे- तिथि ,बारह माह तथा आरती आदि हैं। इन रचनाओं के अतिरिक्त उनकी वाणी श्लोक, पद, अष्टपदियाँ, सोहले, छंद आदि के रूप में विद्यमान है ।

प्रश्न 3 छह सात पंक्तियों वाले प्रश्न ( 2x3=6)

दो कलाकार ( कहानी)

प्रश्न : दो कलाकारकहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : ‘दो कलाकार’ मन्नू भंडारी द्वारा लिखित एक उद्देश्यपूर्ण कहानी है। इस कहानी में लेखक ने मानवीय गुणों को कला से बढ़कर माना है। कहानी में अरुणा और चित्रा दो सहेलियाँ हैं। चित्रा एक प्रसिद्ध चित्रकार है। वह अपने चित्रों से देश-विदेश में प्रसिद्धि पाती है। मरी हुई भिखारिन व उसके साथ चिपक कर रोते हुए बच्चों का चित्र बनाकर वह बहुत नाम कमाती है, लेकिन अरुणा उन्हीं बच्चों को पाल पोस कर बड़ा करती है और उन्हें माँ का प्यार देती है। इस कारण वह चित्रा से भी बड़ी कलाकार कहलाती है।

प्रश्न: दो कलाकारके आधार पर अरुणा का चरित्र चित्रण करें ।
उत्तर:  अरुणा ‘दो कलाकार’ कहानी की एक मुख्य पात्रा है। वह एक सच्ची समाज सेविका है। वह मानवीय गुणों से भरपूर है। छात्रावास में रहते हुए गरीबों, चपरासियों आदि के बच्चों को वह नि:शुल्क पढ़ाती है। दीन-दुखियों की सेवा करती है। किसी के दु:ख को देखकर द्रवित हो उठती है। वह तरह वह अत्यंत भावुक है। वह अपने कर्तव्यों में हमेशा मग्न रहती है। इसी कारण वह अपनी प्रिय सहेली चित्रा की विदाई के समय भी नहीं पहुँच पाती। जिस भिखारिन के चित्र को बनाकर उसकी सहेली चित्रा देश-विदेश में ख्याति पाती है, अरुणा उन्ही बच्चों का माँ बनकर पालन-पोषण करती है। इस तरह वह अपनी महानता का परिचय देती है। इस प्रकार अरुणा अपने मानवीय गुणों के कारण चित्रा से भी बड़ी कलाकार बन जाती है।

प्रश्न: चित्रा एक मंझी हुई चित्रकार है‘, आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर: ‘चित्रा एक मंझी हुई चित्रकार है’ हम इस कथन से पूर्णतया सहमत है। चित्रा को चित्रकला का बहुत शौक है। वह अपना अधिकतर समय चित्र बनाने में व्यतीत करती है। अत्यंत संवेदनशील होने के कारण वह अपने चित्रों में जान भर देती है। मरी हुई भिखारिन और उसके रोते हुए बच्चों का चित्र बनाकर वह देश-विदेश में प्रसिद्धि पाती है। उसकी कला संवेदनशीलता का उदाहरण है। इस तरह हम कह सकते हैं कि चित्रा एक मंझी हुई चित्रकार है ।

प्रश्न दो कलाकारकहानी के शीर्षक की सार्थकता को स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर: ‘दो कलाकार’ शीर्षक हमारे विचार में पूर्णतया सार्थक है। अरुणा और चित्रा दोनों सखियों को लेखिका ने दो कलाकार माना है। चित्रा अपनी चित्रकला के कारण एक कलाकार का दर्जा पाती है, वही अरुणा अपने मानवीय गुणों के कारण चित्रा से भी बड़ी कलाकार कहलाती है। जिस भिखारिन और उसके रोते हुए बच्चों का चित्र बनाकर चित्रा देश-विदेश में प्रसिद्धि पाती है, उन्हीं अनाथ बच्चों का पालन- पोषण कर अरुणा चित्रा से भी बड़ी कलाकार कहलाती है। इस तरह इस कहानी का शीर्षक ‘दो कलाकार’ एक उपयुक्त शीर्षक है।

देश के दुश्मन ( एकांकी )

प्रश्न: पुलिस और सैनिकों के घरवालों को किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ?
उत्तर:  पुलिस और सेना के परिवार के सदस्यों को बहुत सी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है । उन्हें हर पल अपने बच्चों की जान की चिंता बनी रहती है । उन्हें बच्चों की कुशलता की खबर का इंतजार रहता है। वह उनके पत्र की इंतजार करते रहते हैं । माताओं को चिंता लगी रहती है कि उनके बच्चे कब लौट कर आएंगे।

प्रश्न : जयदेव ने तस्करों को कैसे पकड़ा ?
उत्तर: जयदेव ने तस्करों को पकड़ने का पक्का इरादा किया। जब आधी रात को चौकी से दो मील दूर एक खतरनाक घने ढ़ाक के ऊबड़- खाबड़ रास्ते से बॉर्डर पार कर रहे थे तभी उन को चैलेंज किया। उन्होंने बदले में गोलियाँ चलाई। तस्कर जीप लेकर भागने लगे किंतु उनका पीछा किया गया। जयदेव ने अपने अचूक निशाने से उनकी जीप का पहिया उड़ा दिया। जीप लुढ़क कर खड्डे में जा गिरी। तब उन्हें घेर कर पकड़ लिया गया।

प्रश्न : चाचा अपने बेटे बलुआ के विषय में क्या बताते हैं ?

उत्तर : चाचा अपने बेटे बलुआ के विषय में बताते हैं कि वह भी बहुत लापरवाह है। वह भी दो-दो महीनों में चार पाँच चिट्ठी जाने के बाद ही एक आध पत्र लिखता है और उल्टे हमें ही शिक्षा देता है। वह बहुत व्यस्त रहता है। उसे समय नहीं मिलता। उसकी ड्यूटी बहुत कड़ी है। उसे बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिलती।

प्रश्न : चाचा सुमित्रा को अखबार में आई कौन सी खबर सुनाते हैं ?
उत्तर: चाचा सुमित्रा को अखबार में आई यह खबर सुनाते हैं कि अखबार में जयदेव की वीरता और सूझबूझ  की खूब प्रशंसा हुई है। उसने तस्करों से बड़ी बहादुरी से मोर्चा लिया और उनको मार भगाया था। उसने चार लोगों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया और उनसे पाँच लाख रुपये का सोना छीन लिया।

प्रश्न : नीलम अपने पति से उलाहना भरे स्वर में क्या कहती है ?
उत्तर : नीलम अपने पति से उलाहना भरे स्वर में कहती है कि मर्दों का दिल तो पत्थर होता है और विशेषकर रात दिन चोर डाकुओं तथा मौत से खेलने वालों तथा गोलियों की बौछार करने वालों का । नारी का हृदय तो सदा प्रेम से भरा रहता है ।

प्रश्न: डी.सी. को अपने मित्र जयदेव और उनके परिवार पर गर्व क्यों होता है ?
उत्तर: क्योंकि जयदेव में बड़ी वीरता और साहस से तस्करों का मुकाबला करके उनसे पाँच लाख का सोना पकड़ा। उसे गवर्नर की तरफ से दस हज़ार रुपये का इनाम भी दिया गया। इस राशि को जयदेव ने शहीद पुलिस अफसरों की विधवाओं को देने की घोषणा की। जयदेव की इस वीरता और त्याग की भावना के कारण डी सी को जयदेव तथा उसके परिवार पर गर्व होता है।

प्रश्न : पुलिस और सेना के अफसरों को या सैनिकों के घरवालों को किन-किन मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ?
उत्तर: पुलिस और सेना के अफसरों या सैनिकों के घर वालों को बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ।उन्हें अपने बच्चों की जान की चिंता लगी रहती है। हर समय अपने बच्चों की कुशलता की ख़बर का इंतज़ार रहता है। अपने बच्चों के लिए चिंता रहती है कि वे कब लौट कर आएँगे। उनकी चिट्ठी न आने पर मन बहुत सी आशंकाओं से घिरा रहता है।

प्रश्न: निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए :
() बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता मांजी! ऐसे दिव्य बलिदान पर तो देवता भी अर्घ्य चढ़ाते हैं । वह भी स्वर्ग में जय-जयकार करते हुए देश पर निछावर होने वालों का स्वागत करते हैं।
उत्तर: नीलम अपने पति के साहस, शौर्य एवं वीरता का ओजस्वी स्वर में वर्णन करते हुए अपनी‌ सास से कहती है कि जीवन का बलिदान कभी भी बेकार नहीं जाता। देश के लिए किया गया बलिदान तो श्रेष्ठ होता है। ऐसे अनूठे बलिदान पर तो देवता भी पूजा सामग्री चढ़ाते हैं। वे भी स्वर्ग में जय जयकार करते हुए देश पर मर मिटने वाले सैनिकों का‌ स्वागत करते हैं। अर्थात शहीद सभी के लिए पूजनीय हैं।

(ख) बेटा यह ठीक है कि 10 हज़ार की रकम कम नहीं होती । लेकिन उन विधवाओं और मृतकों के परिवारों के बारे में भी तो सोचो, उनकी क्या हालत होगी?
उत्तर : जयदेव इनाम‌ में मिले दस हज़ार रुपये शहीद सैनिकों की विधवाओं को दिए जाने की घोषणा करता है। सुमित्रा की माँ  डी.सी. को कहती है कि दस हज़ार की राशि उनके लिए भी बहुत बड़ी है। लेकिन इस राशि की मृत अफसरों के परिवारों तथा विधवाओं को ज्यादा ज़रूरत है। इससे उनकी सहायता हो जाएगी ।  इस कथन से  जयदेव तथा उनके परिवार की त्याग की भावना का परिचय मिलता है।

(ग) पुलिस और सेना में भी थकना‌! यह एक डिसक्वालीफिकेशन है !
उत्तर:  इन पंक्तियों में सैनिक की वीरता और राष्ट्रभक्ति का वर्णन है ।पत्नी द्वारा थकान की बात सुनकर जयदेव कहने लगा कि पुलिस और सेना में थकान की कोई गुंजाइश नहीं होती। एक सैनिक के लिए थकान एक असफलता होती है। इसलिए सेना में स्फूर्ति, साहस और शौर्य का होना आवश्यक है।

सदाचार का तावीज़ ( निबंध)

प्रश्न : विशेषज्ञों ने भ्रष्टाचार खत्म करने के क्या-क्या उपाय बताए?
उत्तर: विशेषज्ञों ने बताया कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए व्यवस्था बदलने पर जोर दिया जाए। ऐसी नीतियाँ  और क़ानून बनाए जाए जिससे भ्रष्टाचार के अवसर खत्म हो जाएँ। ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर दिया जाए । क्योंकि ठेकेदार किसी न किसी अधिकारी को रिश्वत खिलाते रहते हैं जिससे भ्रष्टाचार बढ़ता है। हमें ऐसे कारणों की जाँच पड़ताल करनी चाहिए जिसके कारण भ्रष्टाचार उत्पन्न होता है ।

प्रश्न:  साधु ने तावीज़ के क्या गुण बताए?
उत्तर: साधु ने तावीज़ के गुणों को बताते हुए कहा कि यह तावीज़ जिसकी भुजा पर बंधा होगा, उसमें बेईमानी नहीं आ सकती । वह गलत रास्ते पर नहीं चलेगा।  यह तावीज़ उसे ईमानदारी के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा। उसके मन से लालच आदि दूर हो जाएगा। वह चाह कर भी भ्रष्टाचार के चंगुल में नहीं फंस पाएगा । उसका आचरण एकदम शुद्ध और आत्मा एकदम पवित्र हो जाएगी।

ठेले पर हिमालय (निबंध )

प्रश्न: कोसी से कौसानी तक में लेखक को किन-किन दृश्यों ने आकर्षित किया ?
उत्तर: कोसी से कौसानी तक लेखक को बहुत से प्राकृतिक दृश्य दिखाई दिए थे। इन दृश्यों ने लेखक को मंत्रमुग्ध कर दिया था। सुडौल पत्थरों पर कल-कल करती कोसी अद्भुत थी। सोमेश्वर की हरी-भरी घाटी के उत्तर में ऊँची पर्वतमाला के शिखर पर कौसानी बसा हुआ था। नीचे पचास मील चौड़ी घाटी में हरे भरे कालीनों जैसी सुंदर वनस्पतियाँ फैली हुई थीं। घाटी के पार हरे खेत, नदियाँ और वन क्षितिज के नीले कोहरे में छिप रहे थे। बादल की एक टुकड़ी के हटते ही पर्वतराज हिमालय दिखाई दिया जो सुंदरता में अद्भुत था। ग्लेशियरों में डूबता सूर्य पिघले हुए केसर जैसा रंग दिखाने लगा था। बर्फ लाल कमल के फूलों जैसी प्रतीत होने लगी थी ।

प्रश्न: लेखक को ऐसा क्यों लगा कि वे किसी दूसरे ही लोक में चले आए हैं?
उत्तर:  लेखक अपने मित्रों के साथ जैसे ही सोमेश्वर की घाटी से चला, उसे उत्तर दिशा में पर्वत शिखर पर कौसानी दिखाई दिया। सारी घाटी में अपार सुंदरता बिखरी हुई थी। सारी घाटी रंग बिरंगी दिखाई दे रही थी । हरे-भरे मखमली कालीन जैसे खेत थे। गेरू के लाल-लाल रास्ते थे। और बेलों की लडियों जैसी सुंदर नदियां थी। ऐसे अद्भुत दृश्यों को देखकर उसे ऐसा लगा जैसे वे किसी दूसरे ही लोक में चले आए हैं ।

प्रश्न: लेखक को ठेले पर हिमालयशीर्षक कैसे  सूझा?
उत्तर: लेखक अपने मित्रों के साथ हिम दर्शन के लिए अल्मोड़ा यात्रा पर गये। लेखक अपने एक मित्र के साथ एक पान की दुकान पर खड़ा था, तभी ठेले पर बर्फ की सिल्ली लादे हुए बर्फ वाला आया। उस बर्फ में से भाप उड़ रही थी। लेखक क्षणभर उसे देखता रहा और उठती भाप में खोया सा रहा। उसे ऐसा अनुभव हो रहा था कि यहीं बर्फ तो हिमालय की शोभा है। इसी शोभा को देखने लेखक मित्रों के साथ कौसानी गया था। इस प्रकार उस  बर्फ को देखकर ही लेखक को लगा  कि ‘ठेले पर हिमालय’ शीर्षक सार्थक है।

गुरु नानक देव जी ( निबंध)

प्रश्न : जिस समय गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ उस समय भारतीय समाज की क्या स्थिति थी ?
उत्तर: जिस समय गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ उस समय भारतीय समाज में अनेक बुराइयाँ  फैली हुई थी । भारत अनेक जातियों, संप्रदायों एवं धर्मों में बँटा हुआ था। धर्म के नाम पर दिखावे का बोलबाला था। लोग रूढ़ियों और आडंबरों में फँसे हुए थे। शासक वर्ग अत्याचारी था। आम जनता शोषण का शिकार थी।

प्रश्न : गुरु नानक देव जी की वाणी की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर : गुरु नानक देव जी की वाणी के 974 पद श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित हैं। आपकी वाणी में अनेक विषयों की चर्चा है। आपने सृष्टि, जीव और ब्रह्म के संबंध में लिखा है। आपने अकाल पुरख के स्वरूप और निवास का भी वर्णन किया है । आपने माया से दूर रहने तथा शुद्ध मन से प्रभु का नाम जपने की प्रेरणा दी है । आपकी वाणी ‘जपुजी साहिब’ के नाम से जानी जाती है। आपकी वाणी की शैली अद्भुत और अनूठी है।

प्रश्न: गुरु नानक देव जी ने अपनी यात्राओं के दौरान कहाँ -कहाँ और किन-किन लोगों को क्या- क्या उपदेश  दिए?
उत्तर: गुरु नानक देव जी ने सन् 1499 से 1522 ई. के बीच चारों दिशाओं की यात्राएँ की, जिन्हें चार उदासियाँ कहा जाता है। इन यात्राओं में वे आसाम, लंका, ताशकंद, मक्का मदीना आदि स्थानों पर गए। इन यात्राओं में आपने मार्ग से भटके हुए सभी वर्ग के लोगों को सही मार्ग पर चलने का उपदेश दिया था। हिंदुओं और मुसलमानों सभी को अपने सहज सरल और मीठी निरंकारी भाषा से सहज धर्म का पालन करने का उपदेश दिया। आपने भोली भाली जनता को उपदेश देकर सही मार्ग दिखाया। आपने कश्मीर के पंडितों के साथ विचार-विमर्श किया। हिमालय के योगियों को भी सही धर्म सिखाया। हिंदू नेताओं को देश सेवा का उपदेश दिया। सभी को सांझे धर्म की शिक्षा दी। आपने अनेक फकीरों, सूफियों, संतो आदि से भी धार्मिक विचार विमर्श किए और लोगों को उपदेश देकर उन्हें सही रास्ता दिखाया।

भाग ख

प्रश्न 4 पत्र लेखन  ( 5 अंक )
1 आपका नाम मोहन है ।आप सरकारी हाई स्कूल लुधियाना में दसवीं कक्षा के छात्र हो। अपनी गलती के लिए क्षमा याचना करते हुए स्कूल के प्रधानाचार्य को पत्र लिखें।
सेवा में
प्रधानाचार्य
सरकारी हाई स्कूल,
लुधियाना।
दिनांक ….
विषय:  क्षमा याचना के लिए प्रार्थना पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके स्कूल में दसवीं बी कक्षा का छात्र हूँ। कल मैने पुस्तकालय में से एक पुस्तक के दो पन्ने फाड़ लिए। मेरी इस चोरी  को मेरे अध्यापक ने देख लिया। मैं अपनी गलती पर बहुत शर्मिंदा हूँ। यह मेरी पहली गलती है। कृपा करके मेरी गलती को क्षमा कर दीजिए। मैं अब कभी ऐसी गलती नहीं करूँगा।
धन्यवाद सहित
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
मोहन,
कक्षा दसवीं बी ।

विषय बदलने के लिए प्रार्थना पत्र
सेवा में
मुख्याध्यापक
……. स्कूल
……शहर।
दिनांक ……
विषय :  विषय बदलने के लिए प्रार्थना पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं दसवीं कक्षा का छात्र हूँ । इस कक्षा में प्रवेश फार्म भरते समय मैंने चित्रकला विषय चुना था । अब मुझे यह विषय कठिन लगता है । मैं इस विषय के स्थान पर  ‘खेतीबाड़ी’ विषय लेना चाहता हूं। कृपा करके मुझे विषय बदलने की आज्ञा दी जाए । आपका आभारी रहूँगा ।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
…….नाम,
कक्षा दसवीं बी

कक्षा की समस्याओं को हल करवाने के संबंध में मुख्याध्यापक को प्रार्थना पत्र
सेवा में
मुख्याध्यापक
….. स्कूल
…. शहर।
दिनांक….
विषय:  कक्षा की समस्याओं को हल करवाने संबंधी ।
महोदय,
निवेदन है कि मैं दसवीं कक्षा का मॉनीटर हूं। मैं आपका ध्यान कक्षा की कुछ समस्याओं की तरफ दिलाना चाहता हूँ । हमारी कक्षा में केवल एक ही पंखा लगा हुआ है। पूरी कक्षा में इसकी हवा नहीं पहुँच पाती। ट्यूबलाइट भी ख़राब है । ब्लैक बोर्ड भी टूटा पड़ा है । बैठने के लिए बेंच भी कम हैं। अतः आपसे निवेदन है कि हमारी इन समस्याओं को जल्दी हल करवा दें। आपका अति धन्यवाद होगा।
आपका आज्ञाकारी शिष्य ,
क.ख.ग.।

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर अपने मोहल्ले की सफाई के लिए प्रार्थना पत्र लिखें।
सेवा में
स्वास्थ्य अधिकारी
नगर निगम
शहर।
दिनांक….
विषय: पटेल नगर की सफाई संबंधी
महोदय,
निवेदन है कि मैं पटेल नगर का निवासी हूँ । मैं आपका ध्यान पटेल नगर में जगह-जगह फैली गंदगी की तरफ दिलाना चाहता हूँ ।
हमारे मोहल्ले में चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे हैं। सभी जगह बदबू फैल गई है। मक्खियाँ और मच्छर इतने बढ़ गये हैं कि हर समय बीमारी फैलने का ड़र बना रहता है।आवारा पशु भी बढ़ गए हैं। हमने सफाई कर्मचारियों से कई बार बात की है मगर वे हमारी बात ही नहीं सुनते।
अतः आपसे निवेदन है कि आप हमारे मुहल्ले में सफाई अभियान चलाकर मुहल्ले की गंदगी को दूर करवाएं ।आशा करता हूं कि आप शीघ्र ही कार्यवाही करेंगे।
धन्यवाद सहित
भवदीय ,
क. ख. ग.
पटेल नगर,
……..शहर।

पंजाब रोडवेज रोड़वेज लुधियाना के महाप्रबंधक को बस में छूट गए सामान के बारे में आवेदन पत्र लिखिए ।
सेवा में
महाप्रबंधक
पंजाब रोड़वेज
लुधियाना ।
दिनांक:
विषय:  बस में छूट गये सामान के बारे में आवेदन पत्र ।
महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैंने दिनांक …. को शाम पाँच  बजे लुधियाना से पी. बी.  2468 नंबर की पंजाब रोडवेज की बस चंडीगढ़ जाने के लिए पकड़ी थी। उस समय बस में काफी भीड़ थी। इसलिए मुझे खड़े होकर ही सफर करना पड़ा। मैंने अपना बैग बस में ही रख दिया। जब चंडीगढ़ आया तो मैं अपना बैग लिए बिना ही नीचे उतर आया। मेरे बैग का रंग नीला है। उसके अंदर बनी जेब में मेरी तस्वीर भी पड़ी है। मेरा पहचान पत्र तथा कुछ जरूरी कागजात भी पड़े हुए हैं।
आशा करता हूँ कि आप मेरे बैग का जल्दी से जल्दी से पता लगा कर मुझे सूचित करेंगे।
धन्यवाद सहित
नाम ….
पता……
मोबाइल नंबर …..

कार्यकारी अधिकारी , विद्युत बोर्ड के नाम बिजली की सप्लाई में कमी के संबंध में आवेदन पत्र लिखिए।
सेवा में
कार्यकारी अधिकारी
विद्युत बोर्ड
विकासनगर।
दिनांक :
विषय : बिजली की सप्लाई में कमी के संबंध में आवेदन पत्र ।
महोदय
मैं विकास नगर का निवासी हूँ। मैं आपका ध्यान विकास नगर में बिजली की सप्लाई में कमी की ओर दिलाना चाहता हूँ। इस क्षेत्र में बिजली की सप्लाई बहुत कम की जाती है जिसके कारण यहाँ के लोगों को बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी तो दिन में सिर्फ दो घंटे ही बिजली आती है। आजकल गर्मी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। छोटे बच्चे, बीमार और बूढ़े बहुत तंग आ गए हैं । विद्यार्थियों के लिए भी बिजली की कम सप्लाई सिरदर्द बनी हुई है। बिजली की इस कमी के कारण हमारी पढ़ाई पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अतः आपसे अनुरोध है कि यदि कहीं कोई खराबी है तो उसे तुरंत ठीक करवाने की कृपा करें। आशा करता हूँ कि इस संबंध में आप शीघ्र ही कार्यवाही करेंगे ।
धन्यवाद सहित
नाम….
पता …..
मोबाइल नंबर ….

रोजाना भारत, पंजाबसमाचार पत्र के मुख्य संपादक के नाम बाल श्रम :एक अपराधविषय पर एक पत्र लिखिए।
सेवा में
मुख्य संपादक
रोजाना भारत
पंजाब।
दिनांक….
विषय : बाल श्रम एक अपराध
महोदय,
मैं आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के माध्यम से ‘बाल श्रम: एक अपराध’ विषय पर अपने विचार रखना चाहता हूँ। “बाल श्रम को सरकार द्वारा एक अपराध घोषित कर दिया गया है। फिर भी बहुत से घरों, दुकानों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड आदि पर बहुत से बच्चे मज़दूरी करते हुए दिखाई देते हैं। इन बच्चों की आयु अभी पढ़ने की होती है। इन बच्चों से बहुत काम लिया जाता है और उन्हें पूरी मजदूरी भी नहीं दी जाती। सरकार द्वारा बाल मजदूरी को रोकने के लिए जो कानून बनाए गए हैं,उनका कठोरता से पालन करना बहुत जरूरी है। कानून को तोड़ने वालों को कठोर से कठोर सज़ा मिलनी चाहिए। अगर जनता भी सरकार को सहयोग देगी तो इस अपराध को रोकने में हमें सफलता मिलेगी।”
मैं आशा करता हूँ कि आप मेरे इस लेख को अपने समाचार पत्र में स्थान देंगे।
धन्यवाद सहित,
नाम……
पता……
मोबाइल नंबर…

प्रश्न 5 अनुच्छेद लेखन ( 5 अंक )

मेरी दिनचर्या
दिनचर्या का अर्थ है : नित्य किए जाने वाले काम। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की दिनचर्या अलग-अलग हो सकती है। मेरी दिनचर्या कुछ इस प्रकार है। मैं सुबह पाँच बजे उठकर अपने पिताजी के साथ सैर के लिए जाता हूँ । कुछ व्यायाम भी करता हूँ। घर आकर नहा धोकर कुछ देर अभ्यास करता हूँ क्योंकि उस समय दिमाग ताज़ा होता है। फिर नाश्ता करके आठ बजे स्कूल चला जाता हूँ। स्कूल में अध्यापकों के कहने के अनुसार सभी काम करता हूँ। स्कूल से छुट्टी होने पर घर जाकर कुछ देर आराम करता हूँ। फिर उठकर स्कूल से दिए गए होमवर्क करता हूँ। शाम को कुछ देर फुटबॉल खेलने जाता हूँ। वहाँ से आकर लगभग एक घंटा टेलिविजन पर अपना मनपसंद कार्यक्रम देखता हूँ। फिर प्रभु को स्मरण कर सो जाता हूँ। इस दिनचर्या से मेरा जीवन नियमित हो गया है।

मेरे जीवन का लक्ष्य
प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का कोई न कोई लक्ष्य अवश्य होता है। मैं अब दसवीं कक्षा का विद्यार्थी हूँ। मैंने भी अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर लिया है। मैं बड़ा होकर एक अध्यापक बनना चाहता हूँ। अध्यापक का समाज के विकास में बहुत बड़ा योगदान है। एक अध्यापक पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों को और भी बहुत कुछ सिखाता है। उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। वह उनकी प्रतिभा की पहचान कर सही दिशा में लगाता है। नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा देता है। अनुशासन में रहना सिखाता है। समय का महत्व समझाता है। एक अध्यापक ही बच्चों को शिक्षा देकर उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, पायलट वैज्ञानिक व अन्य बड़े-बड़े पदों पर पहुँचाता है। मेरे मामा जी भी एक अध्यापक हैं। वे भी मुझे अक्सर प्रेरित करते रहते हैं। उनकी शिक्षा तथा अपनी मेहनत व लग्न से मैं अपने जीवन का लक्ष्य हासिल कर लूँगा ।

प्रकृति का वरदान: पेड़ पौधे
प्रकृति ने हमें बहुत से उपहार वरदान में दिए हैं जिनमें से पेड़ पौधे मुख्य हैं । इनका जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। ये कार्बन डाइऑक्साइड लेकर हमें ऑक्सीजन देते हैं जो कि हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है। ये हमें सुगंध देते हैं। गर्मी में हमें छाया देते हैं। ये बहुत परोपकारी हैं। हमें कितनी ही तरह के फल और फूल देते हैं। इनसे रबड़, गोंद ,लकड़ी व कागज़ बनता है । कई प्रकार की दवा भी बनती हैं। पेड़ों से वातावरण शुद्ध बनता है । ऐसे भी कई पेड़ है जिनकी पूजा की जाती है । जैसे कि तुलसी,पीपल,केला, बरगद आदि।लोग पेड़ों से टोकरियाँ, बैग, लकड़ी का सामान बना कर बेचते हैं।अतः पेडों के बहुत लाभ हैं। हमें इनकी रक्षा करनी चाहिए। अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। ये हमें सदा लाभ ही देंगे। कहा भी गया है – ‘पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ’ ।

गाँव का खेल मेला
हमारे गाँव में हर वर्ष खेल मेले का आयोजन किया जाता है। इस बार भी 14 नवंबर को वार्षिक खेल मेले का आयोजन किया गया। सारे गाँव को बहुत बढ़िया तरीके से सजाया गया। गाँव के सभी बच्चे, बूढ़े , नौजवान पुरुष व स्त्रियाँ मेले को बहुत उत्साह के साथ देखने पहुँचे। मेले का उद्घाटन सरपंच के द्वारा किया गया। यह मेला दो दिन का था। पहले दिन लंबी कूद, ऊँची कूद, सौ मीटर दौड़ करवाई गयीं तथा दूसरे दिन कुश्ती, कबड्डी व साइकिल दौड़ का आयोजन किया गया। कबड्डी के खेल ने सभी ग्रामवासियों का मनोरंजन किया। भंगड़े की टीम ने भी सभी का मन मोह लिया। अंत में मुख्य अतिथि जी ने जीतने वाले सभी खिलाड़ियों को इनाम बाँटे तथा खेलों का महत्व बताया। सचमुच हमारे गाँव का खेल मेला बहुत रोमांचकारी होता है।

विद्यार्थी और अनुशासन
‘अनुशासन’ शब्द अनु + शासन दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘अनु’ का अर्थ है ‘पीछे’ तथा ‘शासन’ का अर्थ है नियम अथवा नियंत्रण आदि। अतः अनुशासन का अर्थ हुआ नियमों के अनुसार चलना। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है। आज के विद्यार्थी कल के नेता हैं। विद्यार्थी को अनुशासन में रहना बहुत ज़रूरी  है। उन्हें अनुशासन को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण व आवश्यक अंग मानना चाहिए। कक्षा में शांतिपूर्वक बैठकर अध्यापकों को सुनना ,विद्यालय के नियमों का पालन करना, समय का सदुपयोग करना, पुस्तकालय में चुपचाप बैठकर पढ़ना और खेल के मैदान आदि में भी नियमों में रहना- यह सब बातें अनुशासन के अन्तर्गत आती हैं। विद्यार्थी को कभी भी अनुशासनहीनता का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। अगर विद्यार्थी अनुशासन में रहकर पढ़ाई और सभी कार्य करेंगे तो अवश्य ही अपने जीवन में सफल होंगे। ऐसे विद्यार्थी ही एक अच्छे समाज और अच्छे राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं तथा देश के विकास में अपना योगदान दे सकते हैं।

परीक्षा में अच्छे अंक पाना ही सफलता का मापदंड नही
यह सच है कि परीक्षा विद्यार्थी के पूरे वर्ष की मेहनत का परिणाम होती है। इसलिए परीक्षा के अंक विद्यार्थी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। अच्छे अंक पाने वाले विद्यार्थी सभी को प्रिय लगते हैं। उनके जीवन में यह अंक बहुत काम भी आते हैं। लेकिन सफलता पाने के लिए केवल परीक्षा में अच्छे अंक पा लेना ही काफी नहीं होता । इसके साथ साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, मेहनत, निरंतर अभ्यास, सूझ बूझ, धैर्य, अनुभव, दृढ निश्चय आदि की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है। अगर परीक्षा में किसी कारण अंक कुछ कम रह गये तो इसका यह मतलब नही कि आप जीवन में असफल हो जाएँगे। अपितु सफल होने के लिए आवश्यक है कि विद्यार्थी अपनी रुचि व क्षमता को पहचाने और उसी क्षेत्र में पूरे परिश्रम के साथ प्रयत्न करे। अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरी तरह उस में जुट जाएँ तो व्यक्ति अवश्य सफल होता है। विश्व में बहुत से वैज्ञानिक, गणितज्ञ, अभिनेता, खिलाड़ी गायक, व्यवसायी ,संगीतज्ञ है जिन्होंने अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर सफलता के शिखर को छुआ। उनकी सफलता का राज उनकी परीक्षा के अंक नहीं थे। इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं कि हमें परीक्षा में अच्छे अंक लेने के लिए प्रयत्न ही नहीं करना चाहिए। अगर किसी कारण परीक्षा में अंक ज्यादा न भी आ पाये तो हमें निराश नहीं होना चाहिए अपितु अपनी क्षमता को पहचानते हुए लग्न व दृढ़ निश्चय के साथ काम करते हुए सफलता को प्राप्त करना चाहिए क्योंकि केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना ही सफलता का मापदंड नहीं है।

कोचिंग संस्थानों का बढ़ता जंजा
आज के दौर में सभी क्षेत्रों में दाखिला लेने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। इन परीक्षाओं के अंकों के आधार पर विद्यार्थी को दाखिला मिलता है।  इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए आज जगह-जगह कोचिंग संस्थान खुल गए हैं। यह संस्थान हजारों लाखों की फीस लेकर विद्यार्थियों को छोटी कक्षाओं तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग देते हैं। इससे विद्यार्थी पर बोझ पड़ता है। विद्यार्थी के माता-पिता पर भी आर्थिक बोझ बढ़ता है। यदि देखा जाए तो जब ये संस्थान नहीं थे तब भी विद्यार्थी अपने अध्यापकों से शिक्षा प्राप्त करके सभी जगह प्रवेश पाते थे। आज भी हमें बहुत से ऐसे उदाहरण देखने को मिलते हैं जिनमें गरीब परिवारों के विद्यार्थी इन संस्थानों से कोचिंग लिए बिना भी अच्छी मेरिट प्राप्त कर लेते हैं। इसलिए हमें आज अपनी मानसिकता बदलनी होगी। स्कूल कॉलेज में से शिक्षा प्राप्त करके ही आत्मविश्वास के साथ इन परीक्षाओं की तैयारी करके हम इन कोचिंग संस्थानों के जाल से मुक्त हो सकते हैं ।

मैंने लोहड़ी का त्यौहार कैसे मनाया
इस वर्ष मैंने अपने मित्रों के साथ मिलकर लोहड़ी का त्यौहार मनाया। प्रत्येक घर से सौ सौ- रुपए इकट्ठे किए ।तीन-चार दिन पहले ही लोहड़ी की तैयारियां शुरू कर दी। सभी ने कोई न कोई जिम्मेदारी ली। कुछ मित्र लकड़ियाँ और उपले खरीदने चले गए तो कुछ मित्र रेवड़ियाँ , गजक, मूंगफली खरीदने चले गए। मैंने सभी के लिए कॉफी का प्रबंध किया। लोहड़ी वाले दिन शाम को लकड़ियों का ढेर बनाकर उनमें अग्नि प्रज्वलित की गई। सभी ने जलती हुई लकड़ियों  की परिक्रमा की तथा माथा टेका। चारों ओर  एकता तथा भाईचारे का वातावरण बन गया था। हमने सभी को मूंगफली, गजक, रेवड़ी और कॉफी दी। इतने में ढोल वाले ने ढोल बजाना शुरू कर दिया। सभी लड़कों ने भंगड़ा डाला। मोहल्ले के लोग हमारे द्वारा किए गए प्रबंध से बहुत खुश थे। हमें लोगों ने अगले वर्ष फिर इसी तरह लोहड़ी मनाने के लिए आग्रह किया। इस तरह सभी हंसी-खुशी अपने अपने घरों को लौट आए। सचमुच मुझे अपने मोहल्ले के सभी लोगों द्वारा एक साथ मिलकर लोहड़ी मनाना आज भी याद है।

भ्रूण हत्या : एक जघन्य अपराध
भारत पूरे विश्व में अहिंसा, शांति और सद्भावना के लिए जाना जाता है । किंतु कन्या भ्रूण हत्या जैसे अनैतिक कार्य से इस देश की महानता खंडित हुई है । विज्ञान की अल्ट्रासाउंड तकनीक से  जन्म से पूर्व ही भ्रूण लिंग की जानकारी मिल जाती है । लेकिन इस तकनीक ने कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा दिया है । खेद की बात तो यह है कि अशिक्षित व गरीब लोगों के साथ-साथ शिक्षित व सम्पन्न वर्ग भी इस कुकृत्य में लगा हुआ है । आज भी अधिकांश लोग कन्या के जन्म पर शोक मनाते हैं या उसकी जन्म से संतुष्ट नहीं होते हैं । एक तरफ तो लोग नवरात्रों में बालिकाओं का पूजन करते हैं और दूसरी ओर कन्या भ्रूण हत्या को अंजाम देते हैं । लोगों को यही लगता है कि पुत्र ही वंश को आगे बढ़ाता है और बुढ़ापे का सहारा है । जबकि सच यह है कि लड़की शादी के बाद दोनों कुलों को रोशन करती है । भ्रूण हत्या अनैतिक ही नहीं अपितु एक अपराध भी है । इस अपराध से निपटने के लिए सरकार ने सख्त कानून भी बनाए हैं । लेकिन कानून बना देना ही समस्या का समाधान नहीं है । लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी ताकि कन्या भ्रूण जैसे अपराध को रोका जा सके  ।

भाग ग

प्रश्न 6   पंजाबी गद्यांशों का हिंदी अनुवाद (4 अंक )

1. ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਬੇਰੁਜ਼ਗਾਰੀ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਇਕ ਚਿੰਤਾ ਦਾ ਵਿਸ਼ਾ ਹੈਇਸ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਬੇਰੁਜ਼ਗਾਰਾਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਦਿਨੋਦਿਨ ਵੱਧਦੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈਹਰੇਕ ਨੌਜਵਾਨ ਚੰਗੀ ਨੌਕਰੀ ਵੱਲ ਨੂੰ ਭੱਜਦਾ ਹੈ
भारत में बेरोजगारी की समस्या एक चिंता का विषय है । इस देश में बेरोजगारों की गिनती दिन -प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। प्रत्येक नौजवान अच्छी नौकरी की ओर भागता है।

2. ਖੇਡਾਂ ਦਾ ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਜੀਵਨ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਯੋਗਦਾਨ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਇਹ ਜੀਵਨ ਦਾ ਇਕ ਬਹੁਤ ਹੀ ਲਾਜ਼ਮੀ ਅੰਗ ਹਨਇਹ ਸ਼ਰੀਰ ਨੂੰ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰੱਖਣ ਵਿੱਚ ਸਹਾਇਕ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ
खेलों का मनुष्य के जीवन में बहुत बड़ा योगदान होता है। ये जीवन का एक बहुत ही आवश्यक अंग हैं। ये शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होती हैं ।

3. ਮੋਬਾਇਲ ਅੱਜ ਸਾਡੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦਾ ਅਹਿਮ ਹਿੱਸਾ ਬਣ ਗਿਆ ਹੈਫਿਰ ਵੀ ਸਾਨੂੰ ਇਸਦਾ ਬੜੀ ਹੀ ਸਮਝਦਾਰੀ ਨਾਲ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈਕੇਵਲ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੋਣ ਤੇ ਹੀ ਮੋਬਾਇਲ ਫੋਨ ਦਾ ਪ੍ਰਯੋਗ ਕਰਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ
मोबाइल आज हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गया है। फिर भी हमें इसका बहुत ही समझदारी के साथ प्रयोग करना चाहिए। केवल  बहुत आवश्यक होने पर ही मोबाइल फोन का प्रयोग करना चाहिए।

4.ਜੀਵਨ ਵਿਚ ਮਿਹਨਤ ਦਾ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵ ਹੈਮਿਹਨਤੀ ਵਿਅਕਤੀ ਜੇਕਰ ਦ੍ਰਿੜ ਸੰਕਲਪ ਵੀ ਹੋਵੇ ਤਾਂ ਉਹ ਕਈ ਵਾਰ ਅਜਿਹੇ ਕੰਮ ਵੀ ਕਰ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਜੋ ਕਿ ਆਮ ਇਨਸਾਨ ਨੂੰ ਅਸੰਭਵ ਲੱਗਦੇ ਹਨ
जीवन में मेहनत का बहुत महत्व है। मेहनती व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प भी हो तो वह कई बार ऐसे काम भी कर जाता है जो एक साधारण इन्सान को असंभव लगते हैं ।

5.ਸਾਨੂੰ ਆਪਣੇ ਤਨ ਨੂੰ ਤੰਦਰੁਸਤ ਰੱਖਣ ਲਈ ਕਸਰਤ ਕਰਨ ਦੀ ਆਦਤ ਪਾਉਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈਕਸਰਤ ਨਾਲ ਕੇਵਲ ਤਨ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸਗੋਂ ਸਾਡਾ ਮਨ ਵੀ ਚੰਗਾ ਬਣਦਾ ਹੈਜਦੋਂ ਤਨ ਅਤੇ ਮਨ ਦੋਵੇਂ ਤੰਦਰੁਸਤ ਹੋ ਜਾਣਗੇ ਤਾਂ ਸਾਡੇ ਮਨ ਵਿੱਚ ਚੰਗੇ ਵਿਚਾਰ ਆਉਣਗੇ
हमें अपने तन को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम करने की आदत डालनी चाहिए। व्यायाम से केवल तन ही नहीं बल्कि हमारा मन भी अच्छा बनता है। जब तन और मन दोनों स्वस्थ हो जाएंगे तो हमारे मन में अच्छे विचार आएंगे।

प्रश्न 7  सूचना , प्रतिवेदन , विज्ञापन  (4 अंक )                 

सूचना

1 स्कूल के मुख्याध्यापक की तरफ से सेक्शन बदलने संबंधी सूचना तैयार करें।
सेक्शन बदलने संबंधी सूचना
दिनांक …
स्कूल की सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि सेक्शन बदलने की अंतिम तिथि 7 अप्रैल 2022 है। जो विद्यार्थी अपना सेक्शन बदलना‌ चाहते हैं, नियत तिथि से पहले अपना नाम नोट करवा दें।
मुख्याध्यापक
सरकारी हाई स्कूल
चंडीगढ़ ।

2  आपका नाम रवि है। आप सरकारी हाई स्कूल पटियाला में एन. एस. एस. यूनिट के सचिव हैं। अपने स्कूल में लगने वाले रक्तदान शिविर संबंधी सूचना लिखें।
रक्तदान शिविर संबंधी सूचना
दिनांक…
स्कूल के सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि स्कूल में सिविल अस्पताल की तरफ से 15 अप्रैल 2022 को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जो भी विद्यार्थी रक्तदान करना चाहें, अपने नाम अपने कक्षा अध्यापक को 15 अप्रैल से पहले लिखवा दें ।
रवि
सचिव
एन. एस. एस. यूनिट
सरकारी हाई स्कूल
पटियाला।

3  आपका नाम चार्वी है। आप आदर्श इंटरनेशनल स्कूल दादर (मुम्बई) में पढ़ती हैं। आप अपने स्कूल की वार्षिक पत्रिका की छात्र सम्पादिका हैं। आप विद्यार्थियों से स्कूल की वार्षिक पत्रिका वर्ष 2022 के अंक के लिए कहानियाँ, कविताएँ, लघु कथाएँ, लेख प्राप्त करने के लिए अपनी ओर से सूचना तैयार कीजिए।
स्कूल मैगज़ीन में रचनाएँ छपवाने सम्बन्धी सूचना
15 नवम्बर, 2022
स्कूल के सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि वर्ष 2022 की वार्षिक पत्रिका में जो विद्यार्थी अपनी रचनाएँ जैसे कहानियाँ, कविताएँ, लघु कथाएँ व लेख छपवाना चाहते हैं, वे अपनी रचनाएँ 1 दिसम्बर 2022 तक अधोहस्ताक्षरी को जमा करवा दें।
चार्वी
(छात्र-सम्पादिका)
स्कूल पत्रिका
आदर्शइंटर नेशनल स्कूल 

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                          4. आपका नाम मुकेश वर्मा है। आपके माँ सरस्वती विद्यालयजगाधरी के दसवीं कक्षा के विद्यार्थी शैक्षिक भ्रमण हेतु दिनांक 14 सितम्बर, 2022 को रॉक गार्डन देखने चंडीगढ़ जा रहे हैं। आप स्कूल के छात्रसंघ के सचिव हैं। आप अपनी ओर से इस सम्बन्ध में एक सूचना तैयार कीजिए।
                           रॉक गार्डन देखने जाने सम्बन्धी सूचना                           
01 सितम्बर, 2022
दसवीं कक्षा के सभी विदयार्थियों को सूचित किया जाता है कि इस बार दसवीं कक्षा के विद्यार्थी शैक्षिक भ्रमण हेतु दिनांक 14 सितम्बर, 2022 को रॉक गार्डन देखने चंडीगढ़ जा रहे हैं।जो विद्यार्थी इस भ्रमण दल के साथ जाने के इच्छुक हैं, वे अपने नाम अधोहस्ताक्षरी को लिखवा दें।
मुकेश वर्मा
सचिव
(छात्र संघ)
माँ सरस्वती विद्यालय, जगाधरी
5 प्रिंसिपल, सरकारी हाई स्कूल, लुधियाना की तरफ से स्कूल में मनाए जाने वाले गणतंत्र दिवस संबंधी सूचना तैयार करें।
गणतंत्र दिवस मनाने संबंधी सूचना
दिनांक…..
स्कूल के सभी अध्यापकों व छात्रों को सूचित किया जाता है कि हर साल की तरह इस बार भी 26 जनवरी 2022 को सुबह 8:00 बजे स्कूल में गणतंत्र दिवस का आयोजन किया जा रहा है। सभी अध्यापकों और छात्रों का समय पर आना जरूरी है।
प्रिंसिपल
सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल
लुधियाना।

6  वर्दी न पहन कर आने वाले विद्यार्थियों के लिए सूचना
दिनांक ……
स्कूल के विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि स्कूल में प्रतिदिन वर्दी पहनकर आएं। जो विद्यार्थी बिना वर्दी के स्कूल आएंगे, उन पर कार्यवाही की जाएगी । वर्दी सिलवाने के लिए दो दिन का समय दिया जाता है।
प्रिंसिपल
सरकारी हाई स्कूल ,
बठिंडा
माता-पिता-शिक्षक-बैठक सम्बन्धी सूचना
दिनांक 01.10.2022
आपको सूचित किया जाता है कि स्कूल में दिनांक 15.10.2022 को अभिभावक-शिक्षक बैठक सुबह 9.00 बजे से लेकर 1.00 बजे तक रखी गयी है। इस बैठक में विद्यार्थी अपने माता पिता के साथ स्कूल की वर्दी में आएँ।
मुख्याध्यापक
सरकारी हाई स्कूल
क.ख.ग.

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1 किराए के लिए खाली
दो बैडरूम, ड्राइंग रूम, डायनिंग रूम वाला मकान किराए के लिए खाली है। इच्छुक व्यक्ति संपर्क करें :
नाम…..पता……मोबाइल नंबर….

2 कोठी बिकाऊ है
नोएडा के सेक्टर 17 में एक 10 मरले की बिल्कुल नई बनी हुई कोठी बिकाऊ है। खरीदने के इच्छुक संपर्क करें :
नाम…. पता …..मोबाइल नंबर

3 गाड़ी बिकाऊ है
मारुति 800 ,मॉडल 2009 ,कीमत 70000 ,बढ़िया चलती हालत में कार बिकाऊ है। संपर्क करें: 9876543210

4 सेल्समैन की आवश्यकता
कपड़े की दुकान पर काम करने के लिए एक सेल्समैन की आवश्यकता है। वेतन बातचीत द्वारा तय किया जाएगा। संपर्क करें: नाम…..पता …..मोबाइल नंबर

5 ड्राइवर की आवश्यकता है
स्कूल बस के लिए एक कुशल ड्राइवर चाहिए जिसे बस चलाने का कम से कम दस साल का अनुभव हो। आयु 55 साल से अधिक न हो। ड्राइविंग लाइसेंस, घर के पक्के पते व चार तस्वीरों के साथ स्वयं एक सप्ताह के भीतर मिलें। प्रिंसिपल, जागृति पब्लिक स्कूल, सेक्टर-48-सी, चंडीगढ़ -160047

6 माली की आवश्यकता है
एक कुशल माली की आवश्यकता है जो बाग बगीचे का काम अच्छी तरह से जानता हो। सात दिन के भीतर सम्पर्क करें। कोठी नम्बर बी 254 सेक्टर-14, करनाल, मोबाइल नम्बर 188899932

7 स्कूल में दाखिले सम्बन्धी विज्ञापन
सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूल, रामपुर में छठी से बारहवीं तक की कक्षाओं के लिए दाखिला शुरू हो गया है। हिंदी, पंजाबी तथा अंग्रेज़ी माध्यम से शिक्षा के अवसर उपलब्ध हैं। होनहार, गरीब तथा कमज़ोर विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का विशेष प्रबन्ध है। अनेक सुविधाएँ, खेलकूद व कम्प्यूटर शिक्षा की समुचित व्यवस्था। आदर्श कुमार, प्रिंसिपल, टेलीफ़ोन – 0178-34436789

8 वधू चाहिए
25 वर्ष आयु का लड़का, कद 5 फुट 8 इंच, योग्यता एम.ए. (अंग्रेज़ी) एम.बी.ए. (होटल मैनेजमैंट) पाँच सितारा होटल में मैनेजर, रंग गोरा के लिए बिना दहेज योग्य वधू चाहिए। सम्पर्क करें- सुखदेव कुमार, मोबाइल नम्बर -1878787787

9 वर चाहिए
22 वर्ष आयु की लड़की, कद 5 फुट 4 इंच, रंग गोरा, योग्यता एम.ए. (हिंदी) बी.एड., स्कूल में अध्यापिका के लिए योग्य वर चाहिए। सम्पर्क करें – विकास कुमार, मोबाइल नम्बर – 1987645454, 1756453446

10 नाम परिवर्तन
मैं गुरमीत कुमार, सुपुत्र श्री रमेश कुमार शर्मा निवासी मकान नंबर 235, सेक्टर 17 चंडीगढ़ आज से अपना नाम गुरमीत कुमार शर्मा रख रहा हूँ। अब मुझे इस नाम से पुकारा जाए । संबंधित व्यक्ति नोट करें।

आपका नाम रविशंकर है। आप मकान नम्बर 456, सेक्टर 15, गुड़गाँव में रहते हैं। आपका मोबाइल नम्बर 1467564545 है। आपका हिसार (हरियाणा) में प्रेम नगरमें दस मरले का एक प्लॉट है। आप इसे बेचना चाहते हैं। प्लॉट विकाळ हैशीर्षक के अन्तर्गत विज्ञापन का प्रारूप तैयार करके लिखिए।

प्लॉट बिकाऊ है

‘प्रेम नगर’ हिसार (हरियाणा) में दस मरले का एक ‘प्लॉट बिकाऊ है।’ खरीदने के इच्छुक सम्पर्क करें- रविशंकर, मकान नम्बर- 456, सेक्टर 15, गुड़गाँव। मोबाइल नम्बर 1467564545

प्रतिवेदन

1 मान लीजिए आपका नाम मोहन है। आप राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय चंडीगढ़ में  सांस्कृतिक कार्यक्रम के अध्यक्ष हो।अपने स्कूल में मनाए गए स्वतंत्रता दिवस संबंधी प्रतिवेदन तैयार करें।

                    स्वतंत्रता दिवस का आयोजन

राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय चंडीगढ़ में दिनांक 15 अगस्त 2021 को स्वतंत्रता दिवस का आयोजन किया गया। स्कूल के मुख्य अध्यापक श्री हरमीत सिंह जी द्वारा राष्ट्रीय झंडा फहराया गया । विभिन्न विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। स्कूल  के हिंदी अध्यापक श्री विनोद कुमार जी ने अपने भाषण के द्वारा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में राष्ट्रगान हुआ और सभी को लड्डू बाँटे गये।
मोहन
अध्यक्ष
सांस्कृतिक कार्यक्रम
राष्ट्रीय माध्यमिक विद्यालय
चंडीगढ़।

2 सुंदर लिखाई प्रतियोगिता संबंधी प्रतिवेदन तैयार करें।
सुंदर लिखाई प्रतियोगिता का आयोजन
सनातन धर्म हाई स्कूल लुधियाना में दिनांक 20 मई 2021 को सुंदर लिखाई प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में स्कूल के 50 विद्यार्थियों ने भाग लिया । पहले दूसरे तथा तीसरे स्थान पर आने वाले विद्यार्थियों को मुख्य अध्यापक जी द्वारा इनाम बाँटे गये।
रोहित कुमार
अध्यक्ष
सांस्कृतिक कार्यक्रम
सनातन धर्म हाई स्कूल , लुधियाना।

3. आपका नाम संदीप कुमार है आप सरकारी हाई स्कूल नवांशहर में छात्र संघ के सचिव हो। आपके स्कूल में दिनांक 14 जुलाई 2021को ट्रैफिक पुलिस अधिकारी द्वारा विद्यार्थियों को सड़क पर चलने के नियमों की जानकारी दी गई तथा इस संबंधी पढ़ने की सामग्री भी दी गई । इस आधार पर प्रतिवेदन लिखें ।                                                         
 ट्रैफिक दिवस का आयोजन
सरकारी हाई स्कूल नवांशहर में दिनांक 14 जुलाई 2021 को ट्रैफिक पुलिस अधिकारी द्वारा स्कूल के सभी विद्यार्थियों को सड़क पर चलने के नियमों की जानकारी दी गई तथा इस संबंधी पढ़ने की सामग्री भी दी गई । विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक जानकारी हासिल की। अंत में मुख्याध्यापक जी ने सभी का धन्यवाद किया ।

संदीप कुमार
सचिव
छात्र संघ
सरकारी हाई स्कूल
नवांशहर

भाग

प्रश्न 8 प्रपत्र पूर्ति  (5 अंक)

निम्नलिखित प्रपत्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका पर उतारकर भरें:-

1) मान लीजिए आपका नाम दीपक कुमार है। आपका सुविधा बैंक, शाखा बठिंडा मेँ एक बचत खाता नंबर 986433222 है। आपको अपने इस खाते मेँ से 10000 रूपए निकलवाने हैं। इस अनुसार निम्नलिखित प्रपत्र भरें:

सुविधा बैंक, शाखा बठिंडा

                        बचत बैंक आहरण प्रपत्र            दिनांक ………..

बचत खाता धारक का नाम ……………………………………………….. खाता नंबर…………………………………

कृपया मुझे …………………… (रुपए अंकों में) ……………………………………………………….. (रुपए शब्दोंमेँ)       अदा करें ।

खाताधारक के हस्ताक्षर ………………………………..

2) मान लीजिए आपका नाम गुरविंदर है। आपका पंजाब बैंक, शाखा मुक्तसर मेँ एक बचत खाता है, जिसका नंबर 98798765 है । आपको अपने इस खाते मेँ 1500 रुपए जमा करवाने हैँ। इस अनुसार निम्नलिखित प्रपत्र भरें:

पंजाब बैंक, शाखा मुक्तसर

बैंक मेँ रुपए जमा करवाने के लिए प्रपत्र

जमा बचत खाता नंबर ………………………………………………….. जो कि………………………………………………….. ………………………………………………….. के नाम से है, मेँ रुपए …………………………………………………… (अंकों में) ………………………………………………………………………………………..  (रुपए शब्दोंमेँ) जमा करें ।

जमाकर्ता के हस्ताक्षर …………………………………………………..

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