योजक की परिभाषा एवं उदाहरण

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योजक

(I) गिल्लू परदे पर चढ़ा और नीचे उतर गया।

(II) गिल्‍लू अन्य खाने की चीज़ें लेना बन्द कर देता था या झूले से नीचे फेंक देता था।

(III) उनका मुझसे लगाव कम नहीं है परन्तु उनमें से किसी को मेरे साथ मेरी थाली में खाने की हिम्मत नहीं हुई।

(IV) भूख लगने पर गिल्लू का चिक-चिक करना ऐसा लगा मानो मुझे अपने भूखे होने की सूचना देता हो।

(V) सोनजुही की लता के नीचे गिल्लू को समाधि दी गयी, क्योंकि उसे वह लता सबसे प्रिय थी।

(VI) गिलहरियों के जीवन की अवधि दो वर्ष से अधिक नहीं होती, अत: गिल्लू की जीवन यात्रा का अंत आ ही गया।

(VII) गिल्लू को कौवे की चोंच से घाव हो गया था, इसलिए वह निश्चेष्ट-सा गमले से चिपका पड़ा था।

उपर्युक्त वाक्यों में ‘और’, ‘या’, ‘परन्तु‘, ‘मानो‘, ‘क्योंकि’, ‘अतः, तथा इसलिएशब्द दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ रहे हैं। इन शब्दों को योजक या समुच्चयबोधक शब्द कहते हैं ।

         अतएव दो शब्दों, वाक्य के अंशों और वाक्यों को जोड़ने वाले शब्दों को योजक या समुच्चयबोधक कहते हैं।

         अन्य योजक शब्द:- एवं, तथा, यानि, कि यद्यपि—-तथापि, चाहे—-फिर भी, किंतु, चाहे, पर आदि।

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