05 अंकों वाले (दीर्घ उत्तरीय) प्रश्न कहानी, निबंध और एकांकी भाग
भाग-IV: पाँच अंकों वाले प्रश्न
1. कहानी भाग
कहानी: ममता
(1) ममता का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर : ममता, कहानी की नायिका, मंत्री चूड़ामणि की इकलौती विधवा पुत्री है। वह असहाय होने के बावजूद भी दृढ़ चरित्र वाली, धैर्यवान, त्याग और ममता की मूर्ति है। पिता द्वारा ली गई रिश्वत को ठुकराना उसके स्वाभिमान को प्रकट करता है एवं अनजान पथिक को शरण देकर स्वयं खंडहरों में चले जाना उसके त्याग, समर्पण, ममता और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरे लगाव को दिखाता है। वह जीवन भर दूसरों के सुख–दुख में सहभागिन रही, जिसके परिणामस्वरूप गाँव की स्त्रियाँ उसकी असहाय अवस्था में सेवा कर रही थीं। इस प्रकार उसकी झोंपड़ी के स्थान पर बनने वाले भवन के प्रति उसकी उदासीनता ममता के चरित्र की अनासक्ति का परिचायक है।
(2) कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर : इसमें कहानीकार ने जहाँ एक ओर रिश्वतखोरी, बेईमानी की बात की है वहीं दूसरी ओर भारतीय संस्कृति के उच्चतम मूल्यों को पिरोया है। कहानीकार विधर्मियों की मानसिकता पर भी गहरी चोट करता है। ‘अतिथि देवो भव’, त्याग, समर्पण, दृढ़ चरित्र के साथ–साथ, मुगलों की मानसिकता का पराक्षेप कहानी के अंतिम वाक्य ‘‘सातों देश के नरेश हुमायूँ ने एक दिन यहाँ विश्राम किया था। उनके पुत्र अकबर ने उनकी स्मृति में यह गगनचुम्बी मंदिर बनवाया।’’ से एकदम खुलकर सामने आ जाता है। कहानीकार हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति अडिग एवं विदेशियों के कार्यों की छद्मता और मानसिकता की समझ से जोड़ना चाहता है।
कहानी: अशिक्षित का हृदय
(3) मनोहर सिंह का चरित्र चित्रण कीजिए।
उत्तर : मनोहर सिंह 55 वर्षीय रिटायर्ड फौजी है जो गाँव में अकेलेपन का जीवन बिता रहा है। वह कहानी का केंद्र बिंदु है। वह संवेदनशील, संतोषी, परिश्रमी, निडर और दृढ़ निश्चय वाला है। जीवन यापन के लिए खेती करता है, परंतु अकाल पड़ने से कर्ज़दार बन जाता है। परिणामस्वरूप उसे भावनात्मक संबंध होने के बावजूद भी अपना नीम का पेड़ गिरवी रखना पड़ता है। वह उसे किसी भी कीमत पर कटने नहीं देना चाहता था। जब ठाकुर शिवपाल उसे कटवाना चाहते थे तो वह अपना संयम खो देता है और उसे कटने से बचाने के लिए निडर होकर तलवार लेकर सामना भी करता है।
(4) ‘अशिक्षित का हृदय’ कहानी का क्या उद्देश्य है?
उत्तर : विरासत के प्रति लगाव, कृतज्ञता, प्रेम भावना को बनाये रखना और जी–जान से उसकी रक्षा करना कहानी का मूल उद्देश्य है। जीवन में हमारी जिसने भी सहायता या साथ दिया है, उसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। मनोहर पेड़ को बचाकर अशिक्षित होते हुए भी उदार और संवेदनशील हृदय का परिचय देता है। कहानीकार इन गुणों के प्रसार को ही लेकर चला है।
कहानी: दो कलाकार
(5) दो कलाकार कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर—‘दो कलाकार’ कहानी में मानवता की भावना को सबसे बड़ी कला माना है। अरुणा और चित्रा दो सहेलियाँ हैं। चित्रा एक चित्रकार है जबकि अरुणा एक समाज सेविका है। चित्रा की प्रसिद्धि का आधार उसकी चित्रकला है। देश–विदेश में उसकी कला की धूम मची है, लेकिन अरुणा ईश्वर की बनाई हुई कृतियों को सँवारने में लगी है। इसलिए वह समाज सेवा के काम में ही लगी रहती है। जहाँ चित्रा मरी हुई भिखारिन व उसके दो बच्चों को पिता देखकर उनके चित्र बनाने में जुट जाती है वहाँ अरुणा उन दो अनाथ बच्चों को अपनाकर ईश्वर की इस कला को कितना सम्मान देती है। मन्नू भंडारी ने परोक्ष रूप से इन दो कलाकारों को हमारे सामने रखते हुए बाकी बात पाठक पर छोड़ दी है। कहानीकार फिर भी अरुणा की मानवता की भावना को अधिक महत्व देना चाहता है।
(6) दो कलाकार के आधार पर अरुणा का चरित्र चित्रण करें।
उत्तर—‘दो कलाकार’ कहानी में अरुणा मुख्य पात्रा है। वह अपना समय और सेहत गँवाकर भी मानवता का हित करना चाहती है इसलिए बाढ़ पीड़ितों की मदद के बाद जब वह होस्टल में आती है तो उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं होता। वह होस्टल में चपरासियों के बच्चों को पढ़ाती है। अरुणा में मानवता की भावना कूट–कूट कर भरी है। अरुणा को इस बात की परवाह नहीं कि समाज उसके बारे में क्या कहेगा। वह बिना किसी की परवाह किए भिखारिन के दोनों बच्चों को अपना लेती है। यह कोई छोटी बात नहीं है। वह चित्रा की अच्छी मित्र है। उसे कोई आत्म–प्रशंसा या अवार्ड की ज़रूरत नहीं। वास्तव में अरुणा बिना किसी स्वार्थ के मानवता का कल्याण करने वाली लड़की है।
कहानी: नर्स
(7) नर्स कहानी का उद्देश्य अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर—‘नर्स’ कहानी में नर्स का कर्तव्य रोगी का इलाज करना, उसकी देखभाल करना ही नहीं बल्कि उसका दायित्व रोगी की मन:स्थिति से परिचित होकर उसके अनुरूप व्यवहार करना भी है। इस कहानी में अस्पताल में दाखिल छह वर्षीय महेश को अपनी माँ के बिना अच्छा नहीं लगता। ऐसे में सिस्टर सुसान चिकित्सा और उपचार के अतिरिक्त बातचीत से उसे माँ जैसी ममता, स्नेह और दूसरों की पीड़ा के अहसास से जोड़ती है। यह अहसास महेश के लिए किसी भी दवाई से अधिक उपयोगी साबित होता है। सिस्टर सुसान महेश का विश्वास जीत उसका मनोबल बढ़ाती है और हालात को समझ कर दूसरों के लिए त्याग करना भी सिखाती है।
कहानी: माँ का कमरा
(8) ‘माँ का कमरा’ कहानी का उद्देश्य क्या है?
उत्तर—‘माँ का कमरा’ कहानी का उद्देश्य बुज़ुर्गों की स्थिति को बेहतर बनाना और समाज में विघटित हो रहे मूल्यों को पुनःस्थापित करना है। कहानी की मुख्य पात्र बुज़ुर्ग बसंती डरते हुए बेटे के साथ शहर आती है कि पता नहीं उसके साथ कैसा व्यवहार होगा या उसे रहने के लिए कौन सा कमरा मिलेगा, किंतु बेटे द्वारा सजा संवरा कमरा दिखाने पर वह हैरान रह जाती है। इस प्रकार यह लघुकथा समाज की मानसिकता में बदलाव लाने में योगदान देती है।
लघुकथा: अहसास
(9) लघुकथा ‘अहसास’ का उद्देश्य क्या है?
उत्तर—उषा आर. शर्मा द्वारा रचित ‘अहसास‘ लघुकथा शारीरिक चुनौतियों का सामना करने वाले बच्चों में आत्म विश्वास जगाने वाली एक प्रेरणादायक लघुकथा है। एक दुर्घटना के कारण दिवाकर की एक टांग चली गई थी जिस कारण उसमें एक अधूरेपन की भावना जागने लगी। जब भी वह बाकी लड़के–लड़कियों को उछलते–कूदते देखता तो उसे यह अधूरापन महसूस होता। लेकिन भ्रमण के समय जब वह अपने सहपाठियों और कक्षा अध्यापक की मदद करता है, उस समय वह एक हीरो की तरह सूझ–बूझ और बहादुरी से काम लेता है। कक्षा अध्यापक के शाबाशी देने व प्रधानाचार्य द्वारा दिवाकर को प्रातःकालीन सभा में सम्मानित करने पर उसका खोया हुआ विश्वास वापिस आ जाता है और उसे अहसास हो जाता है कि वह किसी से भी कम नहीं। अतः लेखिका अपने उद्देश्य में सफल रही है।
2. निबंध भाग
निबंध: मित्रता
(10) सच्चे मित्र के कौन–कौन से गुण लेखक ने बताए हैं?
उत्तर—(i) सच्चा मित्र विश्वास के योग्य होना चाहिए। (ii) वह उत्तम वैद्य की तरह निपुण व पारखी होना चाहिए। (iii) उसमें माँ जैसी कोमलता और धैर्य होना चाहिए। (iv) वह सच्चा पथ–प्रदर्शक होना चाहिए। (v) वह बलवान और साहसी होना चाहिए। (vi) वह मृदुल, पुरुषार्थी, शिष्ट और सत्यनिष्ठ हो।
(11) मित्र का चुनाव करते समय हमें किन–किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर—मित्र का चुनाव करते समय हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए : (i) मित्र बनाते समय हमें विवेक से काम लेना चाहिए। (ii) उसके पूर्व आचरण की खोज कर लेनी चाहिए। (iii) उसके स्वभाव को समझ लेना चाहिए। (iv) बुरे विचारों वाले से सदा दूर रहना चाहिए। (v) उसकी बुद्धिमता की परख कर लेनी चाहिए,।
(12) लेखक ने देश के नागरिकों को चुनावों में किन बातों की ओर ध्यान देने के लिए कहा है?
उत्तर—लेखक ने देश के नागरिकों को चुनावों में निम्नलिखित बातों की ओर ध्यान देने के लिए कहा है– (i) जब भी कोई चुनाव हो तो प्रत्येक नागरिक को अपना मत अवश्य देना चाहिए। (ii) सोच–समझकर ठीक उम्मीदवार को मत देना चाहिए। (iii) गलत लोगों के उत्तेजक नारों में नहीं फँसना चाहिए। (iv) गलत लोगों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए। (v) गलत उम्मीदवार को किसी अधिकार की कुर्सी पर नहीं बैठने देना चाहिए चाहे वह संसार में कितना ही प्रतिष्ठित व्यक्ति क्यों न हो।
निबंध: राजेंद्र बाबू
(13) आशय स्पष्ट कीजिये— क्या वह साँचा टूट गया जिसमें ऐसे कठिन कोमल चरित्र ढलते थे।
उत्तर— स्वतंत्रता–आंदोलन ने अनेक आदर्श चरित्रों का निर्माण किया था जिनमें से राजेंद्र बाबू एक थे जिनके मन, वाणी और कर्म में सरलता थी। किंतु आज, नई पीढ़ी में कोई नेता ऐसा नहीं दिखाई पड़ता। लगता है जैसे वह साँचा ही टूट गया जिसमें राजेंद्र बाबू जैसे चरित्र ढलते थे। लेखिका के कहने का तात्पर्य है कि संभवतः ईश्वर ने राजेंद्र बाबू जैसे चरित्र बनाना बंद कर दिया है।
निबंध: सदाचार का तावीज़
(14) ‘सदाचार का तावीज़’ पाठ में छिपे व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर— ‘‘सदाचार का तावीज़’’ पाठ में भ्रष्टाचार की समस्या के हल के लिए बताए गए स्वार्थपूर्ण तरीकों पर व्यंग्य है जिसका प्रतीक तावीज़ है। इस प्रकार लेखक ने समस्याओं के हल कैसे मूर्खतापूर्ण ढूँढे जाते हैं, पर गहरा व्यंग्य किया है। इस कुचक्र में राजा, अधिकारी एवं ढोंगी बाबाओं तक समूची तंत्र व्यवस्था जुड़ी हुई है। लेखक कहना चाहता है कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए समाज में नैतिकता का प्रचार व प्रसार करना होगा। जब व्यक्ति का नैतिक विकास होगा तो समाज और सम्पूर्ण राष्ट्र से भ्रष्टाचार का अंत सम्भव है, अन्यथा नहीं।
निबंध: ठेले पर हिमालय
(15) कोसी से कौसानी तक में लेखक को किन–किन दृश्यों ने आकर्षित किया?
उत्तर— कोसी से कौसानी के बीच लेखक ने सुडौल पत्थरों पर कल–कल करती हुई कोसी नदी, किनारे के छोटे–छोटे सुंदर गाँव तथा हरे–भरे मखमली खेत देखे। रास्ते में कहीं–कहीं पहाड़ी डाकखाने, चाय की दुकानें, नदी–नालों पर बने हुए पुल तथा जंगल देखे।
(16) लेखक को ‘ठेले पर हिमालय’ शीर्षक कैसे सूझा?
उत्तर—लेखक अपने मित्र के साथ बर्फ की घाटी को निकट से देखने के लिए कौसानी गए थे। लेखक वहाँ एक पान की दुकान पर खड़ा था तभी वहाँ ठेले वाला बर्फ की सिलों को लादकर आया। उस ठंडी, चिकनी और चमचमाती बर्फ से भाप उठ रही थी। लेखक उसे देखता था और उठती भाप में खो सा गया। उसे यह अनुभव बहुत ही अद्भुत लगा। उसे लगा कि यही बर्फ हिमालय की शोभा है। अतः वहाँ बर्फ के दृश्य ने लेखक को अत्यंत प्रसन्नता दी। लेखक को ठेले पर बर्फ की सिलों को देखने पर ‘ठेले पर हिमालय’ का शीर्षक सूझा।
निबंध: गुरु नानक देव
(17) जिस समय गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ उस समय भारतीय समाज की क्या स्थिति थी?
उत्तर— जिस समय गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ तब भारतीय समाज अनेक बुराइयों से ग्रस्त था। समाज अनेक जातियों, सम्प्रदायों और धर्मों में विभाजित था। धार्मिक तौर पर पाखंडों, अंधविश्वासों तथा कर्मकांडों का बोलबाला था। ऊँच–नीच व छुआछूत का ज़हर भारतीय लोगों की नस–नस में फैल चुका था। शासक वर्ग अत्याचारी थे। वे आम जनता का शोषण करते थे। जनता शासकों की लूटमार से कराह रही थी। अतः उस समय भारतीय समाज की दशा शोचनीय थी।
(18) गुरु नानक देव जी की वाणी की विशेषता अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर— श्री गुरु ग्रंथ साहिब में 974 पद और 2 श्लोक गुरु नानक देव जी द्वारा रचित हैं। इनमें विभिन्न विषयों की चर्चा की गयी है। मुख्यतः गुरु जी द्वारा सृष्टि, जीव और ब्रह्म के संबंध, अकाल पुरुष का रूप व स्थान, माया का बंधन काटने की प्रेरणा और निर्विकार एवं शुद्ध मन से प्रभु का नाम जपने आदि विषयों की विस्तारपूर्वक चर्चा हुई है। गुरु जी ने प्रातःकालीन प्रार्थना के लिए ‘जपुजी’ की रचना की, जो आज सिख सिद्धांतों का सार कही जा सकती है।
3. एकांकी भाग
एकांकी: सूखी डाली
(19) ‘सूखी डाली’ एकांकी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर— ‘सूखी डाली’ एक शिक्षाप्रद एकांकी है। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि संयुक्त परिवार में विभिन्न रुचियों व विचारों के होते हुए भी सभी को मिलजुलकर रहना चाहिए। ससुराल आकर उसकी तुलना मायके से नहीं करनी चाहिए। इस एकांकी में बेला अपने मायके को ससुराल की अपेक्षा श्रेष्ठ बताने में लगी रहती है जिसके कारण उसकी ननद के साथ कहा–सुनी हो जाती है। अतः हमें शिक्षा मिलती है कि ऐसी स्थिति से बचना चाहिए। हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि हमें दादा जी की तरह समझदारी से काम लेकर परिवार को टूटने से बचाना चाहिए। इस एकांकी से यह भी शिक्षा मिलती है कि हमें परिवार में अभिमान को त्यागकर प्रेम व सहयोग से जीना चाहिए। इंदु, बेला आदि ने दादा जी की बात मानकर घर को टूटने से बचा लिया और एक साथ मिलकर रहने की कसम खायी।
एकांकी: देश के दुश्मन
(20) जयदेव ने तस्करों को कैसे पकड़ा?
उत्तर— जयदेव और अन्य अफसर कैम्प में चौकन्ने बैठे थे तभी संतरियों ने खबर दी कि सीमा से कुछ मील दूर लाइट सी नज़र आई है। जयदेव ने जवानों को जगह–जगह तैनात कर दिया। कैम्प से आधा मील की दूरी पर एक जीप रुकी। उसमें से 6-7 आदमी उतरे तो जयदेव ने उन पर टॉर्च से रोशनी डाली और आदेश दिया–‘खबरदार’ हैंड्स अप। जवाब में उन्होंने गोलियाँ चलायीं। पुलिस ने भी गोलियों से जवाब दिया। इस तरह लड़ाई में पुलिस के दो अफसर मारे गये किंतु पुलिस ने तीन तस्करों को मार गिराया और पाँच लाख का सोना उनसे बरामद किया जबकि 3-4 तस्कर भाग गये।