10th Hinid CWSN अपठित गद्यांश (Unseen Passages)

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यहाँ 4 अंकों वाले लघूत्तर प्रश्न

अपठित गद्यांश (Unseen Passages)

I. मुंशी प्रेमचंद जी का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस के लमही नामक ग्राम में हुआ उनका वास्तविक नाम धनपतराय था उन्होंने शिक्षा विभाग में नौकरी की किंतु असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और पूरी तरह लेखन कार्य में जुट गए वे तो जन्म से ही लेखक और चिंतक थे वे अपनी बात को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से लिखते थे जनता उनकी लेखनी से प्रभावित होने लगी उधर अंग्रेज़ सरकार के कानों में भी उनकी लेखनी की खबरें पहुँच गयीं अंग्रेज़ सरकार ने उनके लेखों पर रोक लगा दी किंतु, उनके मन में उठने वाले स्वतंत्र एवं क्रांतिकारी विचारों को भला कौन रोक सकता था? इसके बाद उन्होंने प्रेमचंद के नाम से लिखना शुरू कर दिया इस तरह वे धनपतराय से प्रेमचंद बन गए सेवासदन, ‘प्रेमाश्रम निर्मला रंगभूमि, ‘कर्मभूमि और गोदान आदि इनके प्रमुख उपन्यास हैं जिनमें सामाजिक समस्याओं का सफल चित्रण है इनके अतिरिक्त उन्होंने ईदगाह, ‘नमक का दारोगा, ‘दो बैलों की कथा बड़े भाई साहब और पंच परमेश्वर आदि अनेक अमर कहानियाँ भी लिखीं वे आजीवन शोषण, रूढ़िवादिता, अज्ञानता और अत्याचारों के विरुद्ध अबाधित गति से लिखते रहे वे समाज में पनप चुकी कुरीतियों से बहुत आहत होते थे, इसलिए उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकने का प्रयास इनकी रचनाओं में सहज ही देखा जा सकता है नि:संदेह वे महान उपन्यासकार कहानीकार थे

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. मुंशी प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम क्या था?

उत्तर: मुंशी प्रेमचंद जी का वास्तविक नाम धनपतराय था

प्रश्न 2. मुंशी प्रेमचंद जी ने सरकारी नौकरी से त्यागपत्र क्यों दे दिया?

उत्तर: उन्होंने असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया

प्रश्न 3. वे आजीवन किसके विरुद्ध लिखते रहे?

उत्तर: वे आजीवन शोषण, रूढ़िवादिता, अज्ञानता और अत्याचारों के विरुद्ध लिखते रहे

प्रश्न 4. ‘अबाधित तथा आहत शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: अबाधितबिना किसी रुकावट के, ‘आहतदु:खी

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए

उत्तर: महान उपन्यासकार कहानीकार: मुंशी प्रेमचंद

 

II. सच्चरित्र दुनिया की समस्त सम्पत्तियों में श्रेष्ठ सम्पत्ति मानी गयी है पृथ्वी, आकाश, जल, वायु और अग्नि पंचभूतों से बना मानवशरीर मौत के बाद समाप्त हो जाता है किंतु चरित्र का अस्तित्व बना रहता है बड़ेबड़े चरित्रवान ऋषिमुनि, विद्वान, महापुरुष आदि इसका प्रमाण हैं आज भी श्री राम, महात्मा बुद्ध, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती आदि अनेक विभूतियाँ समाज में पूजनीय हैं ये अपने सच्चरित्र के द्वारा इतिहास और समाज को नयी दिशा देने में सफल रहे हैं विद्या और धन के साथसाथ चरित्र का अर्जन अत्यंत आवश्यक है यद्यपि लंकापति रावण वेदों और शास्त्रों का महान ज्ञाता और अपार धन का स्वामी था, किंतु सीताहरण जैसे कुकृत्य के कारण उसे अपयश का सामना करना पड़ा आज युगों बीत जाने पर भी उसकी चरित्रहीनता के कारण उसके प्रतिवर्ष पुतले बनाकर जलाए जाते हैं चरित्रहीनता को कोई भी पसंद नहीं करता ऐसा व्यक्ति आत्मशांति, आत्मसम्मान और आत्मसंतोष से सदैव वंचित रहता है वह कभी भी समाज में पूजनीय स्थान नहीं ग्रहण कर पाता है जिस तरह पक्की ईंटों से पक्के भवन का निर्माण होता है उसी तरह सच्चरित्र से अच्छे समाज का निर्माण होता है अतएव सच्चरित्र ही अच्छे समाज की नींव है

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. दुनिया की समस्त सम्पत्तियों में किसे श्रेष्ठ माना गया है?

उत्तर: दुनिया की समस्त सम्पत्तियों में सच्चरित्र को श्रेष्ठ माना गया है

प्रश्न 2. रावण को क्यों अपयश का सामना करना पड़ा?

उत्तर: सीता हरण के कारण रावण को अपयश का सामना करना पड़ा

प्रश्न 3. चरित्रहीन व्यक्ति सदैव किससे वंचित रहता है?

उत्तर: चरित्रहीन व्यक्ति आत्मशांति, आत्मसम्मान और आत्मसंतोष से सदैव वंचित रहता है

प्रश्न 4. ‘श्रेष्ठ तथा प्रमाण शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: श्रेष्ठसबसे बढ़िया, ‘प्रमाणसबूत

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए

उत्तर: श्रेष्ठ सम्पत्ति: सच्चरित्र

 

III.हस्तकला ऐसे कलात्मक कार्य को कहा जाता है जो उपयोग होने के साथसाथ सजाने, पहनने आदि के काम आता है जो चीज़ें मशीनों के माध्यम से बड़े स्तर पर बनायी जाती हैं उन्हें हस्तशिल्प की श्रेणी में नहीं लिया जाता भारत में हस्तशिल्प के पर्याप्त अवसर हैं सभी राज्यों की हस्तकला अनूठी है पंजाब में हाथ से की जाने कढ़ाई की विशेष तकनीक को फुलकारी कहा जाता है इस प्रकार की कढ़ाई से बने दुपट्टे, सूट, चादरें विश्व भर में बहुत प्रसिद्ध हैं इसके अतिरिक्त मँजे (लकड़ी के ढाँचे पर रस्सियों से बुने हुए एक प्रकार के पलंग), पंजाबी जूतियाँ आदि भी प्रसिद्ध हैं राजस्थान वस्त्रों, कीमती हीरे जवाहरात से जड़े आभूषणों, चमकते हुए बर्तनों, मीनाकारी, चूडियाँ, पापड़, चूर्ण, भुजिया आदि के लिए जाना जाता है आंध्रप्रदेश सिल्क की साड़ियों, केरल हाथी दाँत की नक्काशी और शीशम की लकड़ी के फर्नीचर, बंगाल हाथ से बुने हुए कपड़े, तमिलनाडु ताम्र मूर्तियों एवं कांजीवरम साड़ियों, मैसूर रेशम और चंदन की लकड़ी की वस्तुओं, कश्मीर अखरोट की लकड़ी के बने फर्नीचर, कढ़ाई वाली शालों तथा गलीचों, असम बेंत के फर्नीचर, लखनऊ चिकनकारी वाले कपड़ों, बनारस ज़री वाली सिल्क साड़ियों, मध्य प्रदेश चंदेरी और कोसा सिल्क के लिए प्रसिद्ध है इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जब आप उत्कृष्ट अनूठी चीज़ बनाते हैं तो हस्तकला के प्रशंसकों की कमी नहीं रहती

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. हस्तकला किसे कहते हैं?

उत्तर: हस्तकला ऐसे कलात्मक कार्य को कहा जाता है जो उपयोग होने के साथसाथ सजाने, पहनने आदि के काम आता है

प्रश्न 2. किन चीज़ों को हस्तकला की श्रेणी में नहीं लिया जाता?

उत्तर: जो चीज़ें मशीनों के माध्यम से बड़े स्तर पर बनायी जाती हैं उन्हें हस्तशिल्प की श्रेणी में नहीं लिया जाता

प्रश्न 3. पंजाब में हस्तकला के रूप में कौनकौन सी चीज़ें प्रसिद्ध हैं?

उत्तर: पंजाब में हाथ से की जाने कढ़ाई की विशेष तकनीक को फुलकारी कहा जाता है इस प्रकार की कढ़ाई से बने दुपट्टे, सूट, चादरें विश्व भर में बहुत प्रसिद्ध हैं इसके अतिरिक्त मँजे (लकड़ी के ढाँचे पर रस्सियों से बुने हुए एक प्रकार के पलंग), पंजाबी जूतियाँ आदि भी प्रसिद्ध हैं

प्रश्न 4. ‘उत्कृष्ट तथा अनूठी शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: उत्कृष्टबढ़िया तथा अनूठीअनोखी/निराली

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए

उत्तर: भारतीय हस्तकला

 

IV. किशोरावस्था में शारीरिक सामाजिक परिवर्तन आते हैं और इन्हीं परिवर्तनों के साथ किशोरों की भावनाएँ भी प्रभावित होती हैं बारबार टोकना, अधिक उपदेशात्मक बातें किशोर सहन नहीं करना चाहते कोई बात बुरी लगने पर वे क्रोध में शीघ्र जाते हैं यदि उनका कोई मित्र बुरा है तब भी वे यह दलील देते हैं कि वह चाहे बुरा है किंतु मैं तो बुरा नहीं हूँ कई बार वे बेवजह बहस एवं ज़िद के कारण क्रोध करने लगते हैं अभिभावकों को उनके साथ डाँटडपट नहीं अपितु प्यार से पेश आना चाहिए उन्हें सृजनात्मक कार्यों में लगाने के साथसाथ बाज़ार से स्वयं फलसब्ज़ियाँ लाना, बिजलीपानी का बिल अदा करना आदि कार्यों में लगाकर उनकी ऊर्जा को उचित दिशा में लगाना चाहिए अभिभावकों को उन पर विश्वास दिलाना चाहिए उनके अच्छे कामों की प्रशंसा की जानी चाहिए किशोरों को भी चाहिए कि वे यह समझें कि उनके मातापिता मात्र उनका भला चाहते हैं किशोर पढ़ाई को लेकर भी चिंतित रहते हैं वे परीक्षा में अच्छे नम्बर लेने का दबाव बना लेते हैं जिससे उनके शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ता है इसके लिए उन्हें स्वयं योजनाबद्ध तरीके से मन लगाकर पढ़ना चाहिए उन्हें दिनचर्या में खेलकूद, सैर, व्यायाम, संगीत आदि को भी शामिल करना चाहिए इससे उनका तनाव कम होगा उन्हें शिक्षकों से उचित मार्गदर्शन लेना चाहिए कई बार कुछ किशोर किसी विषय को कठिन मानकर उससे भय खाने लगते हैं कि इसमें पास होंगे या नहीं जबकि उन्हें समझना चाहिए कि किसी समस्या का हल डर से नहीं अपितु उसका सामना करने से हो सकता है इसके अतिरिक्त कुछ किशोर शर्मीले स्वभाव के होते हैं, अधिक संवेदनशील होते हैं उनका दायरा भी सीमित होता है वे अपने उसी दायरे के मित्रों को छोड़कर अन्य लोगों से शर्माते हैं इसके लिए उन्हें स्कूल की पाठ्येतर क्रियाओं में भाग लेना चाहिए जिससे उनकी झिझक दूर हो सके

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. किशोरावस्था में किशोरों की भावनाएँ किस प्रकार प्रभावित होती है?

उत्तर: किशोरावस्था में शारीरिक सामाजिक परिवर्तन आते हैं और इन्हीं परिवर्तनों के साथ उनकी भावनाएँ भी प्रभावित होती हैं

प्रश्न 2. किशोरों की ऊर्जा को उचित दिशा में कैसे लगाना चाहिए?

उत्तर: उन्हें सृजनात्मक कार्यों में लगाने के साथसाथ बाज़ार से स्वयं फलसब्ज़ियाँ लेने भेजना, बिजलीपानी का बिल अदा करने आदि कार्यों में लगाकर उनकी ऊर्जा को उचित दिशा में लगाना चाहिए

प्रश्न 3. किशोर अपनी चिंता और दबाव को किस तरह दूर कर सकते हैं?

उत्तर: योजनाबद्ध तरीके से पढ़कर, दिनचर्या में खेलकूद, सैर, व्यायाम और संगीत आदि को शामिल करके अपनी चिंता और दबाव को दूर कर सकते हैं

प्रश्न 4. ‘कठिन तथा संवेदनशील शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: कठिनमुश्किल, ‘संवेदनशीलभावुक

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए

उत्तर: किशोरावस्था: भावनात्मक पक्ष

 

V.जब एक उपभोक्ता अपने घर पर बैठे इंटरनेट के माध्यम से विभिन्न वस्तुओं की खरीदारी करता है तो उसे ऑनलाइन खरीदारी कहा जाता है आज जब चाहें इंटरनेट के माध्यम से खरीदारी कर सकते हैं आज फर्नीचर, किताबें, सौंदर्य प्रसाधन, वस्त्र, खिलौने, जूते, इलैक्ट्रॉनिक उपकरण आदि कुछ भी ऑनलाइन खरीद सकते हैं ऑनलाइन खरीदारी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि जिस वेबसाइट से आप खरीदारी करने जा रहे हैं वह वास्तविक है अथवा नहीं बिक्री के नियम एवं शर्तों को भी अच्छी तरह परख लेना चाहिए लेनदेन पूरा करने के बाद उसका प्रिंट लेना समझदारी होगी यदि आप क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भुगतान करते हैं तो भुगतान के बाद तुरंत जाँच लें कि आपने जो कीमत चुकाई है वह सही है या नहीं यदि आप उसमें कोई भी परिवर्तन पाते हैं तो तत्काल सम्बन्धित अधिकारियों से सम्पर्क स्थापित करके उन्हें सूचित करें वैसे ऐसी साइट्स को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिसमें आर्डर की गई वस्तु की प्राप्ति होने पर नकद भुगतान करने की सुविधा हो एवं खरीदी गई वस्तु नापसंद होने पर वापिस करने का प्रावधान हो

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. ऑनलाइन खरीदारी किसे कहा जाता है?

उत्तर: जब एक उपभोक्ता अपने घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से विभिन्न वस्तुओं की खरीदारी करता है तो उसे ऑनलाइन खरीदारी कहा जाता है

प्रश्न 2. आज इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन क्याक्या खरीदारी कर सकते हो?

उत्तर: इंटरनेट के माध्यम से फर्नीचर, किताबें, सौंदर्य प्रसाधन, वस्त्र, खिलौने, जूते, इलैक्ट्रॉनिक उपकरण आदि कुछ भी ऑनलाइन खरीद सकते हैं

प्रश्न 3. क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने के पश्चात यदि कोई अनियमितता पायी जाती है तो हमें क्या करना चाहिए?

उत्तर: क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर यदि कोई अनियमितता पायी जाती है तो तुरंत सम्बन्धित अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए

प्रश्न 4. ‘वापिस और प्राथमिकता शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: वापिसलौटाना/वापस, प्राथमिकतावरीयता/महत्ता

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए

उत्तर: ऑनलाइन खरीदारी में सजगता

 

VI. पंजाब की संस्कृति का भारतीय संस्कृति में महत्त्वपूर्ण स्थान है पंजाब की धरती पर चारों वेदों की रचना हुई यहीं प्राचीनतम सिंधु घाटी की सभ्यता का जन्म हुआ यह गुरुओं की पवित्र धरती है यहाँ गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक दस गुरुओं ने धार्मिक चेतना तथा लोककल्याण के अनेक सराहनीय कार्य किए हैं गुरु तेगबहादुर जी एवं गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों साहिबज़ादों का बलिदान हमारे लिए प्रेरणादायक है और ऐसा उदाहरण संसार में अन्यत्र कहीं दिखाई नहीं देता यहाँ अमृतसर का श्री हरमंदिर साहिब प्रमुख धार्मिक स्थल है इसके अतिरिक्त आनंदपुर साहिब, कीरतपुर साहिब, मुक्तसर साहिब, फतेहगढ़ साहिब के गुरुद्वारे भी प्रसिद्ध हैं देश के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाब के वीरों ने बढ़चढ़कर भाग लिया देश के अन्न भंडार के लिए सबसे अधिक अनाज पंजाब ही देता है पंजाब में लोहड़ी, बैसाखी, होली, दशहरा, दीपावली आदि त्योहारों के अवसरों पर मेलों का आयोजन भी हर्षोल्लास से किया जाता है आनंदपुर साहिब का होला मोहल्ला, मुक्तसर का माघी मेला, सरहिंद में शहीदी जोर मेला, फरीदकोट में शेख फरीद आगम पर्व, सरहिंद में रोज़ा शरीफ पर उर्स और छपार मेला, जगराओं की रोशनी आदि प्रमुख हैं पंजाबी संस्कृति के विकास में पंजाबी साहित्य का भी महत्वपूर्ण स्थान है मुसलमान सूफी संत शेख फरीद, शाह हुसैन, बुल्लेशाह, गुरु नानकदेव जी, शाह मोहम्मद, गुरु अर्जुनदेव जी आदि की वाणी में पंजाबी साहित्य के दर्शन होते हैं इसके बाद दामोदर, पीलू, वारिस शाह, भाई वीर सिंह, कवि पूर्ण सिंह, धनी राम चात्रिक, शिव कुमार बटालवी, अमृता प्रीतम आदि कवियों, जसवंत सिंह, गुरदयाल सिंह और सोहन सिंह शीतल आदि उपन्यासकारों तथा अजमेर सिंह औलख, बलवंत गार्गी तथा गुरशरण सिंह आदि नाटककारों की पंजाबी साहित्य के उत्थान में सराहनीय भूमिका रही है

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. चारों वेदों की रचना कहाँ हुई?

उत्तर: चारों वेदों की रचना पंजाब की धरती पर हुई

प्रश्न 2. पंजाब के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल कौन से हैं?

उत्तर: अमृतसर, आनंदपुर साहिब, कीरतपुर साहिब, मुक्तसर साहिब, फतेहगढ़ साहिब आदि पंजाब के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल हैं

प्रश्न 3. पंजाब के प्रमुख त्योहार कौन से हैं?

उत्तर: लोहड़ी, वैसाखी, होली, दशहरा, दीपावली आदि पंजाब के प्रमुख त्योहार हैं

प्रश्न 4. ‘सराहनीय तथा हर्षोल्लास शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: सराहनीयप्रशंसनीय, ‘हर्षोल्लासखुशी एवं उमंग

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए

उत्तर: पंजाब की महान संस्कृति

 

VII. इस संसार में प्रकृति द्वारा मनुष्य को दिया गया सबसे अमूल्य उपहार समय है ढह गई इमारत को दोबारा खड़ा किया जा सकता है; बीमार व्यक्ति को इलाज द्वारा स्वस्थ किया जा सकता है; खोया हुआ धन दोबारा प्राप्त किया जा सकता है; किंतु एक बार बीता समय पुनः नहीं पाया जा सकता जो समय के महत्त्व को पहचानता है, वह उन्नति की सीढ़ियाँ चढ़ता जाता है जो समय का तिरस्कार करता है, हर काम में टालमटोल करता है, समय को बर्बाद करता है, समय भी उसे एक दिन बर्बाद कर देता है समय पर किया गया हर काम सफलता में बदल जाता है जबकि समय के बीत जाने पर बहुत कोशिशों के बावजूद भी कार्य को सिद्ध नहीं किया जा सकता समय का सदुपयोग केवल कर्मठ व्यक्ति ही कर सकता है, लापरवाह, कामचोर और आलसी नहीं विद्यार्थी जीवन में समय का अत्यधिक महत्त्व होता है विद्यार्थी को अपने समय का सदुपयोग ज्ञानार्जन में करना चाहिए कि अनावश्यक बातों, आमोदप्रमोद या फैशन में

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. प्रकृति द्वारा मनुष्य को दिया गया सबसे अमूल्य उपहार क्या है?

उत्तर: प्रकृति के द्वारा मनुष्य को दिया गया समय सबसे अमूल्य उपहार है

प्रश्न 2. समय के प्रति सावधान रहने वाला व्यक्ति किससे दूर भागता है?

उत्तर: समय के प्रति सावधान रहने वाला मनुष्य आलस्य से दूर भागता है

प्रश्न 3. विद्यार्थी को समय का सदुपयोग कैसे करना चाहिए?

उत्तर: विद्यार्थी को अपने समय का सदुपयोग ज्ञानार्जन में करना चाहिए

प्रश्न 4. ‘कर्मठ तथा तिरस्कार शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: कर्मठकर्मशील, तिरस्कारअनादर/अपमान

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए

उत्तर: समय: प्रकृति का अमूल्य उपहार

 

VIII. हर देश, जाति और धर्म के महापुरुषों ने सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर बल दिया है, क्योंकि हर समाज में ऐश्वर्यपूर्ण, स्वच्छंद और आडम्बरपूर्ण जीवन जीने वाले लोग अधिक हैं आज मनुष्य की असीमित इच्छाएँ उसे स्वार्थी बना रही हैं वह अपने स्वार्थ के सामने दूसरों की सामान्य इच्छा और आवश्यकता तक की परवाह नहीं करता जबकि विचारों की उच्चता में ऐसी शक्ति होती है कि मनुष्य की इच्छाएँ सीमित हो जाती हैं सादगीपूर्ण जीवन जीने से उसमें संतोष और संयम जैसे अनेक सद्गुण स्वतः ही उत्पन्न हो जाते हैं इसके अतिरिक्त उसके जीवन में लोभ, द्वेष और ईर्ष्या का कोई स्थान नहीं रहता उच्च विचारों से उसका स्वाभिमान भी बढ़ जाता है जो कि उसके चरित्र की प्रमुख पहचान बन जाता है इससे वह छलकपट, प्रमाद और अहंकार से दूर रहता है किंतु आज की इस भागदौड़ वाली ज़िन्दगी में हरेक व्यक्ति की यही लालसा रहती है कि उसकी ज़िन्दगी ऐशोआराम से भरी हो वास्तव में आज के वातावरण में मानव पश्चिमी सभ्यता, फैशन और भौतिक सुख साधनों से भ्रमित होकर उनमें संलिप्त होता जा रहा है ऐसे में मानवता की रक्षा केवल सादा जीवन और उच्च विचार रखने वाले महापुरुषों के आदर्शों पर चलकर ही की जा सकती है

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. हर देश, जाति और धर्म के महापुरुषों ने किस सिद्धांत पर बल दिया है?

उत्तर: हर देश, जाति और धर्म के महापुरुषों ने सादा जीवन और उच्च विचार के सिद्धांत पर बल दिया है

प्रश्न 2. अपने स्वार्थ के सामने मनुष्य को किस चीज़ की परवाह नहीं रहती?

उत्तर: अपने स्वार्थ के सामने मनुष्य दूसरों की सामान्य इच्छा और आवश्यकता तक की परवाह नहीं करता

प्रश्न 3. सादगीपूर्ण जीवन जीने से मनुष्य में कौनकौन से गुण उत्पन्न हो जाते हैं?

उत्तर: सादगीपूर्ण जीवन जीने से मनुष्य में संतोष और संयम जैसे अनेक सद्गुण उत्पन्न हो जाते हैं

प्रश्न 4. ‘प्रमाद तथा लालसा शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: प्रमादउन्माद/नशा तथा लालसाइच्छा/कामना

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए

उत्तर: सादा जीवन और उच्च विचार’।

 

IX. मनुष्य का जीवन कर्मप्रधान है मनुष्य को निष्काम भाव से सफलताअसफलता की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का पालन करना है आशा या निराशा के चक्र में फँसे बिना उसे लगातार कर्तव्यनिष्ठ बना रहना चाहिए किसी भी कर्तव्य की पूर्णता पर सफलता अथवा असफलता प्राप्त होती है असफल व्यक्ति निराश हो जाता है, किंतु मनीषियों ने असफलता को भी सफलता की कुंजी कहा है असफल व्यक्ति अनुभव की सम्पत्ति अर्जित करता है, जो उसके भावी जीवन का निर्माण करती है जीवन में अनेक बार ऐसा होता है कि हम जिस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए परिश्रम करते हैं, वह पूरा नहीं होता है ऐसे अवसर पर सारा परिश्रम व्यर्थ हो गयासा लगता है और हम निराश होकर चुपचाप बैठ जाते हैं उद्देश्य की पूर्ति के लिए पुनः प्रयत्न नहीं करते ऐसे व्यक्ति का जीवन धीरेधीरे बोझ बन जाता है निराशा का अंधकार केवल उसकी कर्मशक्ति, बल्कि उसके समस्त जीवन को ही ढक लेता है मनुष्य जीवन धारण करके कर्मपथ से कभी विचलित नहीं होना चाहिए विघ्नबाधाओं की, सफलताअसफलता की तथा हानिलाभ की चिंता किए बिना कर्तव्य के मार्ग पर चलते रहने में जो आनंद एवं उत्साह है, उसमें ही जीवन की सार्थकता है

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. कर्तव्यपालन में मनुष्य के भीतर कैसा भाव होना चाहिए?

उत्तर: कर्तव्यपालन में मनुष्य के भीतर निष्काम भाव होना चाहिए

प्रश्न 2. सफलता कब प्राप्त होती है?

उत्तर: किसी भी कर्तव्य की पूर्णता पर सफलता प्राप्त होती है

प्रश्न 3. जीवन में असफल होने पर क्या करना चाहिए?

उत्तर: विघ्नबाधाओं की, सफलताअसफलता की तथा हानिलाभ की चिंता किए बिना निरंतर अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कार्य करते रहना चाहिए

प्रश्न 4. ‘निष्काम तथा मनीषियों शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: निष्काम’—कामना एवं वासना से रहित/निर्लिप्त, ‘मनीषियों’—विद्वानों/ज्ञानियों

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए

उत्तर: जीवन में कर्म की प्रधानता

 

X. व्यवसाय या रोज़गार पर आधारित शिक्षा व्यावसायिक शिक्षा कहलाती है व्यावसायिक शिक्षा में ऐसे कोर्स रखे जाते हैं जिनमें व्यावहारिक प्रशिक्षण अर्थात प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर अधिक ज़ोर दिया जाता है व्यावसायिक शिक्षा का दायरा काफी विस्तृत है विद्यार्थी अपनी पसंद क्षमता के आधार पर विभिन्न व्यावसायिक कोर्सों में प्रवेश ले सकते हैं कॉमर्सक्षेत्र में कार्यालय प्रबंधन, आशुलिपि कम्प्यूटर एप्लीकेशन, बैंकिंग, लेखापरीक्षण, मार्केटिंग एण्ड सेल्समैनशिप आदि व्यावसायिक कोर्स आते हैं इंजीनियरिंग क्षेत्र में इलैक्ट्रिकल, इलैक्ट्रॉनिक्स, एयर कंडीशनिंग एण्ड रेफरीजरेशन एवं ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी आदि व्यावसायिक कोर्स आते हैं कृषिक्षेत्र में डेयरी उद्योग, बागबानी तथा कुक्कुट (पोल्ट्री) उद्योग से सम्बन्धित व्यावसायिक कोर्स किए जा सकते हैं गृहविज्ञानक्षेत्र में स्वास्थ्य, ब्यूटी, फैशन तथा वस्त्र उद्योग आदि व्यावसायिक कोर्स आते हैं हेल्थ एंड पैरामेडिकल क्षेत्र में मेडिकल लैबोरेटरी, एक्सरे टेक्नोलॉजी एवं हेल्थ केयर साइंस आदि व्यावसायिक कोर्स किए जा सकते हैं आतिथ्य एवं पर्यटन क्षेत्र में फूड प्रोडक्शन, होटल मैनेजमेंट, टूरिज़्म एण्ड ट्रैवल, बेकरी से सम्बन्धित व्यावसायिक कोर्स किए जा सकते हैं सूचना तकनीक के तहत आई.टी.एप्लीकेशन कोर्स किया जा सकता है इनके अतिरिक्त पुस्तकालय प्रबंधन, जीवन बीमा, पत्रकारिता आदि व्यावसायिक कोर्स किए जा सकते हैं

उपर्युक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

प्रश्न 1. व्यावसायिक शिक्षा से आपका क्या अभिप्राय है?

उत्तर: व्यवसाय या रोज़गार पर आधारित शिक्षा व्यावसायिक शिक्षा कहलाती है

प्रश्न 2. इंजीनियरिंग क्षेत्र में कौनकौन से व्यावसायिक कोर्स आते हैं?

उत्तर: इंजीनियरिंग क्षेत्र में इलैक्ट्रिकल, इलैक्ट्रॉनिक्स, एयर कंडीशनिंग एण्ड रेफरीजरेशन एवं ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी आदि व्यावसायिक कोर्स आते हैं

प्रश्न 3. आतिथ्य एवं पर्यटन क्षेत्र में कौनकौन से कोर्स किए जा सकते हैं?

उत्तर: आतिथ्य एवं पर्यटन क्षेत्र में फूड प्रोडक्शन, होटल मैनेजमेंट, टूरिज़्म ट्रैवल, बेकरी से सम्बन्धित व्यावसायिक कोर्स किए जा सकते हैं

प्रश्न 4. ‘क्षमता तथा विस्तृत शब्दों के अर्थ लिखिए

उत्तर: क्षमताशक्ति/सामर्थ्य, ‘विस्तृतविशाल/बड़ा

प्रश्न 5. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए

उत्तर: व्यावसायिक शिक्षा का महत्त्व

 

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