पाठ 24.कहानी: उपेक्षित (लेखक: डॉ. वीरेंद्र मेहदीरत्ता)

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24.कहानी: उपेक्षित

लेखक: डॉ. वीरेंद्र मेहदीरत्ता

() लगभग 60 शब्दों में उत्तर दें:

प्रश्न 1 कमला का चरित्र चित्रण करें

उत्तर: कमला कहानी के लेखक की पत्नी और नवजात बच्ची की माँ है उसका चरित्र स्नेही और संवेदनशील है प्रसव के बाद उसे बहुत तकलीफ होती है वह अपनी बेटी को देखती है जो चिडि़या के बच्चे की तरहदिखती है वह सामाजिक दबावों को महसूस करती है, लेकिन अंत में, वह अपनी बेटी को छाती से लगा लेती है और दृढ़ता से महसूस करती है कि यह बेटी भी पुत्ररत्न से बढ़कर है

प्रश्न 2 लेखक के मित्रों ने लड़की पैदा होने पर अपने उद्गार कैसे पेश किए?

उत्तर: लेखक के मित्रों और संबंधियों ने बेटी के जन्म पर निराशा या सांत्वना के भाव प्रकट किए मिसेज चोपड़ा, लड़के की माता होने के लाभ गिनाते हुए, लड़की होने पर अफसोस व्यक्त करती हैं दीनानाथ ने व्यंग्यात्मक रूप से लड़की होने पर पाँच लाख का फायदा होने की बात कही वहीं मिसेज गुप्ता ने सांत्वना देते हुए कहा किआपकी तो बेटी बड़ी स्वीट है, जबकि अन्य ने चिंता करने की बात कही

प्रश्न 3 कमला के माँबाप ने लड़की पैदा होने पर उसे कैसे सांत्वना दी?

उत्तर: कमला के मातापिता ने सामाजिक रूढ़ियों के विपरीत बेटी के जन्म पर सकारात्मक उद्गार दिए कमला के पिता ने कहा, “कोई बात नहीं, घर में लक्ष्मी आई है!माँ ने कमला के सिर पर हाथ फेरते हुए एक पंजाबी लोकोक्ति दोहराई: “ ताँवी सुलच्छणी जेड़ी जम्मे पहली लच्छमी!” (ताँबे के समान सुलक्षणों वाली पहली लक्ष्मी) यह कथन दर्शाता है कि वे बेटी के जन्म को शुभ मानते थे

() लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें:

प्रश्न 4 उपेक्षितकहानी का सार अपने शब्दों में लिखें

उत्तर: उपेक्षित कहानी का सारउपेक्षितकहानी डॉ. वीरेंद्र मेहदीरत्ता द्वारा रचित है, जो मध्यकालीन समाज की रूढ़िवादी सोच और बालिका के प्रति उपेक्षा को दर्शाती है कहानी में लेखक की पत्नी कमला एक बेटी को जन्म देती है, लेकिन समाज में व्याप्त पुत्रमोह के कारण घर का माहौल उत्साहपूर्ण नहीं होता लेखक भी बालविवाह, दहेज प्रथा जैसी समस्याओं से जुड़ी मानसिकता के कारण चिंतित महसूस करते हैं

अस्पताल में, नर्सें और बाहरी संबंधी, जैसे चोपड़ा दंपत्ति, बेटी के जन्म को चिंता का विषय मानते हैं एक नर्स तो यहाँ तक कहती है कि लड़कियाँ जन्म के समय से ही माँ का खून चूसने लगती हैं संपत्ति के लोभी दीनानाथ जैसे संबंधी लड़की होने को आर्थिक रियायत (पाँच लाख की छूट) के रूप में देखते हैं दूसरी ओर, कमला के मातापिता नवजात शिशु को लक्ष्मी कहकर सांत्वना देते हैं अंत में, कमला अपनी बेटी को सीने से लगाकर बाहरी उपेक्षा का जवाब देती है, यह महसूस करते हुए कि उसकी यह बेटी भी बढ़कर है कहानी का शीर्षक उपेक्षितइस तथ्य को उजागर करता है कि समाज लड़कियों को किस तरह उपेक्षा की दृष्टि से देखता है

प्रश्न 5 परिवार में लड़की का पैदा होना ठीक क्यों नहीं समझा जाता‘, ‘उपेक्षितकहानी के आधार पर इस तथ्य की पुष्टि करें

उत्तर:उपेक्षितकहानी में यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय समाज में मध्यकाल से चली रही रूढ़ियों के कारण लड़की का जन्म एक अभिशाप और बोझ माना जाता है यह मानसिकता निम्नलिखित कारणों से दिखाई गई है:

दहेज प्रथा और आर्थिक चिंता: रिश्तेदार लड़की होने पर भविष्य के दहेज और शादी के खर्चों की चिंता व्यक्त करते हैं मिसेज चोपड़ा लड़की होने पर दहेज की तैयारी शुरू करने की सलाह देती है, जबकि दीनानाथ जैसे लोग इस जन्म को आर्थिक रियायत के रूप में देखते हैं (पाँच लाख की छूट)

रूढ़िवादी सामाजिक दबाव: कहानी बताती है कि सदियों से चली रही रूढ़ियाँ बदलने में समय लग रहा है जन्म के समय नर्सें भी माँ से कहती हैं कि लड़की का जन्म देने में माँ का खून चूसने लगता है, जिससे यह भावना मजबूत होती है कि लड़कियाँ केवल कष्ट लेकर आती हैं

पुत्र रत्न की अपेक्षा: समाज में पुत्ररत्न की अपेक्षा इतनी गहरी है कि लड़की के जन्म को मुसीबतसमझा जाता है इस कारण लड़की का जन्म मातापिता के मन पर एक बोझ बन जाता है

() सप्रसंग व्याख्या करें:

प्रश्न 6 कपड़ेलत्ते तो बेचारों ने बहुत अच्छे बनाए हैं, तैयारी तो लड़के की थी, पर हुई लड़की!”

सप्रसंग व्याख्या प्रसंग: यह पंक्तियाँ डॉ. वीरेंद्र मेहदीरत्ता द्वारा लिखित कहानी उपेक्षित से उद्धृत हैं यह कथन नर्स द्वारा उस समय कहा जाता है जब वह नवजात बच्ची के पास खड़ी होती है और बच्चे के कपड़े देखकर टिप्पणी करती है व्याख्या: नर्स यहाँ नवजात बच्ची के कपड़े देखकर व्यंग्यात्मक रूप से अफसोस व्यक्त कर रही है वह कहती है कि कपड़े बहुत अच्छे और महंगे हैं, लेकिन यह तैयारी स्पष्ट रूप से एक लड़के के जन्म की आशा में की गई थी चूँकि जन्म लड़की का हुआ है, इसलिए नर्स को लगता है कि कपड़े बेकारहो गए यह टिप्पणी समाज में गहराई तक बैठे हुए पुत्र मोह और लड़की के जन्म को निराशाजनक मानने की प्रवृत्ति को उजागर करती है

प्रश्न 7 लड़कियाँ तो पैदा होने के वक्त से ही माँ का खून चूसने लगती है जान बच जाये तो समझो बड़ी बात है!”

सप्रसंग व्याख्या प्रसंग: यह पंक्तियाँ डॉ. वीरेंद्र मेहदीरत्ता द्वारा लिखित कहानी उपेक्षित से उद्धृत हैं यह कथन लेबररूम में काम करने वाली एक नर्स द्वारा लेखक को उस समय कहा गया जब वह बच्ची के जन्म के बाद माँ की हालत बता रही थी व्याख्या: यह संवाद समाज में प्रचलित उस पुरानी और रूढ़िवादी धारणा को दर्शाता है कि लड़कियाँ जन्म के समय से ही माँ के लिए कष्ट और कठिनाई का कारण बनती हैं खून चूसनेका मुहावरेदार अर्थ यह है कि लड़कियों के जन्म से माँ को शारीरिक और आर्थिक रूप से बहुत अधिक तकलीफ झेलनी पड़ती है नर्स इस बात पर बल देती है कि लड़की को जन्म देने के बाद माँ का स्वयं बच जाना ही बड़ी बात हैयह कथन समाज की बालिका के प्रति गहरी उपेक्षा और दुर्भावना को व्यक्त करता है

प्रश्न 8 ताँवी सुलच्छणी जेड़ी जम्मे पहली लच्छमी!”

सप्रसंग व्याख्या प्रसंग: यह भावनात्मक पंक्तियाँ डॉ. वीरेंद्र मेहदीरत्ता द्वारा लिखित कहानी उपेक्षित से उद्धृत हैं यह कथन कमला की माँ द्वारा अपनी बेटी कमला को सांत्वना देने के लिए कहा जाता है, जब उसे पहली संतान के रूप में लड़की हुई है, और वे जानती हैं कि समाज में पुत्रमोह व्याप्त है व्याख्या: यह कथन पंजाबी भाषा की एक लोकप्रियोक्ति है और इसका अर्थ है, “ ताँबे के समान सुलक्षणों वाली जो पहली लक्ष्मी के रूप में जन्मी है!कमला की माँ, समाज के लोभी और रूढ़िवादी विचारों के विपरीत, नवजात पोती को सीधे लक्ष्मी का रूप बताती हैं यह संवाद माँ की अपनी बेटी के प्रति सहानुभूति और पोती के प्रति निस्वार्थ प्रेम को दर्शाता है, जो पारंपरिक पुत्र मोह की सोच को नकारकर बेटी के जन्म को शुभ और सौभाग्यशाली मानता है

प्रश्न 9 मैं तो कहती हूँ लड़की हो या लड़का, पर हो किस्मत वाला

सप्रसंग व्याख्या प्रसंग: यह कथन डॉ. वीरेंद्र मेहदीरत्ता द्वारा लिखित कहानी उपेक्षित से उद्धृत है यह कथन लेखक के घर आए मित्रों में से एक, मिसेज गुप्ता द्वारा कहा गया है, जो कमला की तारीफ़ कर रही थीं और अन्य संबंधियों की लिंग भेद वाली बातों को सुन चुकी थीं व्याख्या: मिसेज गुप्ता का यह कथन उन अन्य संबंधियों की बातों से अलग है जो यह चिंता जता रहे थे कि लड़की पैदा हुई है और दहेज का बोझ बढ़ेगा मिसेज गुप्ता लिंग भेद की संकीर्णता से ऊपर उठकर एक आधुनिक सोच प्रस्तुत करती हैं उनका मानना है कि बच्चे का लिंग (लड़का या लड़की) उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना उसका भाग्यवान होनायह कथन दर्शाता है कि समाज में कुछ लोग पुरानी रूढ़ियों को तोड़ रहे हैं और बच्चे के जन्म को केवल लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि उसके भविष्य और अच्छे भाग्य के आधार पर महत्व दे रहे हैं

 

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