पाठ 8. पौधों की पीढ़ियाँ (हरिवंशराय बच्चन) 📝

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8. पौधों की पीढ़ियाँ (हरिवंशराय बच्चन) 📝

यह संकलन हरिवंशराय बच्चन की दो महत्वपूर्ण कविताओं, पौधों की पीढ़ियाँ और अन्धेरे का दीपक को प्रस्तुत करता हैपौधों की पीढ़ियाँउल्लास और मस्ती के कवि बच्चन जी की वह कविता है जो युग सत्य को दर्शाती हैइसमें कवि ने प्राचीन और नवीन युग के बोध में बदलती हुई विचारधारा को चित्रित किया हैयह कविता साहित्य क्षेत्र में आई नवीन विचारधाराओं (प्रगतिवाद) के प्रभाव पर भी प्रकाश डालना चाहती हैयह कविता बहुत दिन बीते संग्रह से ली गई है

🌳पौधों की पीढ़ियाँकी सप्रसंग व्याख्या

1. प्रथम पद्यांश

देखा, एक बड़ा बरगद का पेड़ खड़ा है;
उसके नीचे हैं
छोटेछोटे कुछ पौधे
बड़े सुशीलविनम्र
लगे मुझसे यों कहने,
हम कितने सौभाग्यवान हैं
आसमान से आग बरसे, पानी बरसे,
आँधी टूटे, हमको कोई फ़िकर नहीं है
एक बड़े की वरद छत्रछाया के नीचे
हम अपने दिन बिता रहे हैं
बड़े सुखी हैं
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य पुस्तकहिंदी पुस्तक 12′ में संकलित कवितापौधों की पीढ़ियाँसे लिया गया है इसके रचयिता हरिवंशराय बच्चन हैं यहाँ कवि प्राचीन युगबोध के अंतर्गत आने वाली नई पीढ़ी (छोटे पौधे) की विचारधारा को प्रस्तुत कर रहा है, जो अपने बुजुर्गों (बड़ा बरगद) के संरक्षण में स्वयं को सुरक्षित और सुखी महसूस करती है

व्याख्या: कवि एक बड़े बरगद के पेड़ को देखता हैउसके नीचे कुछ छोटेछोटे पौधे खड़े हैं, जो स्वभाव से बहुत सुशील और विनम्र हैंवे कवि से कहते हैं कि वे कितने सौभाग्यशाली हैंउन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है कि आसमान से आग बरसे (गर्मी), पानी बरसे, या कोई आँधी जाएवे एक बड़े (बरगद) की वरद (शुभ) छत्रछाया के नीचे अपने दिन बिता रहे हैंवे कहते हैं कि वे बहुत सुखी हैंयह दृष्टिकोण प्राचीन समय के लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो किसी बड़े व्यक्ति की छत्रछाया में सुख और सुरक्षा का अनुभव करते थे

2. द्वितीय पद्यांश

देखा, एक बड़ा बरगद का पेड़ खड़ा है;
उसके नीचे हैं
छोटेछोटे कुछ पौधे
असंतुष्ट और रुष्ट
देखकर मुझको बोले,
हम भी कितने बदकिस्मत हैं!
जो खतरों का नहीं सामना करते
कैसे वे ऊपर को उठ सकते हैं
इसी बड़े की छाया ने तो
हमको बौना बना रखा :
हम बड़े दुखी है
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य पुस्तकहिंदी पुस्तक 12′ में संकलित कवितापौधों की पीढ़ियाँसे लिया गया है इसके रचयिता हरिवंशराय बच्चन हैं यहाँ कवि युग बदलने के साथ आई नवीन विचारधारा को प्रस्तुत कर रहा है, जहाँ नई पीढ़ी (छोटे पौधे) पुराने बुजुर्गों (बड़ा बरगद) के प्रभुत्व को अपनी प्रगति में बाधक मानती है

व्याख्या: कवि फिर से उसी बड़े बरगद के पेड़ को देखता हैइस बार उसके नीचे खड़े छोटे पौधे असंतुष्ट और रुष्ट (नाराज) हैंवे कवि को देखकर कहते हैं कि वे कितने बदकिस्मत (दुर्भाग्यशाली) हैंउनका मानना है कि जो खतरों का सामना नहीं करते, वे ऊपर (प्रगति) कैसे कर सकते हैंवे दुख व्यक्त करते हुए कहते हैं कि इसी बड़े (बरगद) की छाया ने उन्हें बौना (छोटे कद का, अधूरा) बनाकर रखा हैयह भाव नई पीढ़ी के मन में उत्पन्न हुए परिवर्तन को दर्शाता है, जहाँ उन्हें बड़े बुजुर्गों का आधिपत्य अपनी प्रगति में रुकावट लगने लगा है

3. तृतीय पद्यांश
देखा, एक बड़ा बरगद पेड़ खड़ा है ;
उसके नीचे हैं
छोटेछोटे कुछ पौधे
तने हुए उद्दण्ड
देखकर मुझको गरजे,
हमको छोटा रखकर ही
यह बड़ा बना है ;
जन्म अगर हम पहले पाते
तो हम इसके अग्रज होते,
हम इसके दादा कहलाते,
नहीं वक्त का जुल्म हमेशा
हम यों ही सहते जाएँगे
हम काँटों की
इस पर छाते
आरी और कुल्हाड़ी अब तैयार करेंगे :
फिर जब आप यहाँ आएँगे,
बरगद की डालीडाली कटती पाएँगे :
ठूंठमात्र यह रह जाएगा
नंगाबूचा
और निगल जाएंगे तन हम इसे समूचा
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य पुस्तकहिंदी पुस्तक 12′ में संकलित कवितापौधों की पीढ़ियाँसे लिया गया है इसके रचयिता हरिवंशराय बच्चन हैं यह पद्यांश नवीन युगबोध के अंतर्गत नई पीढ़ी के चरम विक्षोभ और बगावत के भाव को दर्शाता है, जो पुरानी सत्ता (बरगद) का समूल नाश करने को तत्पर है

व्याख्या: कवि एक बार फिर बड़े बरगद को देखता हैइस बार छोटे पौधे उद्दण्ड (बगावत के स्वर) होकर तने हुए हैंवे कवि को देखकर गरजते (ज़ोर से बोलते) हैंवे आरोप लगाते हैं कि बरगद उन्हें छोटा रखकर ही बड़ा बना हैवे कहते हैं कि अगर उनका जन्म पहले हुआ होता, तो वे ही इस बरगद के अग्रज (बड़े) या दादा कहलातेअब वे हमेशा वक्त के इस ज़ुल्म को सहन नहीं करेंगेवे काँटों की तरह इस बरगद पर छा जाने की बात कहते हैंवे घोषणा करते हैं कि अब वे आरी और कुल्हाड़ी तैयार करेंगे और अगली बार जब कवि यहाँ आएगा, तो बरगद की डालीडाली कटी हुई मिलेगीबरगद केवल एक ठूंठमात्र, नंगाबूचा रह जाएगा, और वे समूचे बरगद को तन (शरीर) से निगल जाएंगेयह विक्षोभ समय के साथ नई पीढ़ी को उद्दण्ड बना देता है, जिसके कारण बड़ों का अस्तित्व उनके लिए असह्य हो जाता है और वे बगावत करके समूल नाश करना चाहते हैं

💡 अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

() लगभग 40 शब्दों में उत्तर दें :
प्रश्न 1. ‘पौधों की पीढ़ियाँमें छोटेछोटे सुशील और विनम्र पौधों का क्या कहना है?
उत्तर: छोटेछोटे सुशील और विनम्र पौधों का कहना है कि वे बहुत सौभाग्यशाली हैं, क्योंकि वे एक बड़े बरगद की वरद (शुभ) छत्रछाया के नीचे अपने दिन बिता रहे हैंउन्हें आग, पानी या आँधी की कोई फिकर नहीं है और वे स्वयं को बहुत सुखी मानते हैंयह प्राचीन युगबोध को दर्शाता है

प्रश्न 2. ‘बरगद का पेड़किस का प्रतीक है? स्पष्ट करें
उत्तर: ‘बरगद का पेड़प्राचीन युगबोध या बुजुर्ग पीढ़ी का प्रतीक हैयह उन बड़े बुजुर्ग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है जिनकी छत्रछाया या आधिपत्य में पुरानी पीढ़ी सुख और सुरक्षा का अनुभव करती थी , लेकिन नई पीढ़ी इसे अपनी प्रगति में बाधक समझने लगी हैयह साहित्य में पुरानी विचारधारा का भी प्रतीक हो सकता है

प्रश्न 3. ‘पौधों की पीढ़ियाँयुग सत्य को उद्भासित करती हैं, स्पष्ट करें
उत्तर: हाँ, ‘पौधों की पीढ़ियाँयुग सत्य को उद्भासित करती हैंयह कविता दिखाती है कि कैसे युग परिवर्तन के साथ मूल्यों और विचारधारा में परिवर्तन आता हैजहाँ एक ओर प्राचीन पीढ़ी बुजुर्गों के संरक्षण में सुखी थी , वहीं नई पीढ़ी उनके आधिपत्य को अपनी प्रगति का बाधक मानकर बगावत तक करने लगती है

प्रश्न 4. ‘मधु पात्र टूटनेतथा मन्दिर के ढहनेके द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?
उत्तर: ‘मधु पात्र टूटनेऔरमन्दिर के ढहनेके द्वारा कवि यह कहना चाहता है कि जीवन में जब कल्पनाओं से बना कमनीय महल (सुखद सपने) ढह जाए या मनमोहक मधुपात्र (अमूल्य निधि) टूट जाए (यानी दुख और हानि हो), तब भी मनुष्य को निराश नहीं होना चाहिएकवि संदेश देता है कि टूटे हुए ईंटपत्थर से भी शांति की कुटिया 58बनाई जा सकती है और निर्मल स्रोत से प्यास बुझाई जा सकती है

प्रश्न 5. ‘अंधेरे का दीपककविता का सार लिखो
उत्तर: ‘अंधेरे का दीपकआशावादी गीत है जोसतरंगिनीसंग्रह में संकलित हैकविता का सार यह है कि दुःख और अवसादपूर्ण क्षणों (अँधेरी रात) में भी मनुष्य को आशा (दीपक) नहीं छोड़नी चाहिएभले ही सुनहरे सपने बिखर जाएं या अमूल्य निधि खो जाए, मनुष्य को जो शेष है उसी से अपना नया संसार रचने का प्रयास करना चाहिए

() सप्रसंग व्याख्या करें :

प्रश्न 6.कल्पना के हाथ से कमनीयथा

कल्पना के हाथ से कमनीय

जो मन्दिर बना था,

भावना के हाथ ने जिसमें

वितानों को तना था,

स्वप्न ने अपने करों से

था जिसे रुचि से सँवारा

स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों

से, रसों से जो सना था

प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य पुस्तकहिंदी पुस्तक 12′ में संकलित कविताअंधेरे का दीपकसे लिया गया है इसके रचयिता हरिवंशराय बच्चन हैं यह पद्यांश उस सुखद अतीत या उन सुनहरे सपनों की बात करता है जो जीवन में किसी कारणवश नष्ट हो गए हैं, जिससे निराशा उत्पन्न हुई है

व्याख्या: कवि उन सुन्दर (कमनीय) भवनों (मन्दिर/महल) का चित्रण कर रहा है जो कल्पनाओं से निर्मित हुए थेइन भवनों में भावनाओं के हाथों ने शामियाने (वितान) तान दिए थेस्वप्नों ने अपने हाथों (करों) से उन्हें रुचिपूर्वक सँवारा थाये भवन स्वर्ग के उन रंगों और रसों से सने हुए थे जिन्हें प्राप्त करना कठिन (दुष्प्राप्य) थासंक्षेप में, ये पंक्तियाँ अत्यधिक सुंदर, महत्वपूर्ण और प्रिय वस्तुओं, संबंधों, या सुनहरे सपनों का वर्णन करती हैं जो अब टूट चुके हैं, जिससे कवि दुखी है

प्रश्न 7. नहीं वक्त का जुल्म हमेशाइसे समूचा

नहीं वक्त का जुल्म हमेशा

हम यों ही सहते जाएँगे

हम काँटों की

इस पर छाते

आरी और कुल्हाड़ी अब तैयार करेंगे :

फिर जब आप यहाँ आएँगे,

बरगद की डालीडाली कटती पाएँगे :

ठूंठमात्र यह रह जाएगा

नंगाबूचा

और निगल जाएंगे तन हम इसे समूचा

प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिंदी की पाठ्य पुस्तकहिंदी पुस्तक 12′ में संकलित कवितापौधों की पीढ़ियाँसे लिया गया है इसके रचयिता हरिवंशराय बच्चन हैं यह पद्यांश नवीन पीढ़ी के उस असह्य विक्षोभ और उद्दण्ड बगावत को दर्शाता है, जिसके तहत वे पुरानी सत्ता (बरगद) का समूल नाश करने की धमकी दे रहे हैं

व्याख्या: उद्दण्ड (बागी) पौधे यह घोषणा करते हैं कि वे वक्त (समय) के इस ज़ुल्म (यानी बड़े बरगद के आधिपत्य) को हमेशा इसी प्रकार सहन नहीं करते रहेंगेवे काँटों की तरह बरगद पर छा जाने की बात करते हैंवे बताते हैं कि अब वे बदला लेने के लिए आरी और कुल्हाड़ी जैसे हथियार तैयार करेंगेवे कवि से कहते हैं कि जब वह अगली बार यहाँ आएगा, तो उसे बरगद की हर डाली कटी हुई मिलेगीबरगद अब केवल एक ठूंठमात्र, नंगाबूचा (अर्थात् असहाय) रह जाएगाऔर फिर वे समूचे बरगद को तन से (यानी पूरी तरह) निगल जाएंगे (नष्ट कर देंगे)। यह वक्तव्य नई पीढ़ी द्वारा पुरानी पीढ़ी के अस्तित्व को नकारने और बगावत करने की चरम भावना को व्यक्त करता है

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