हरमीत नाम का एक बूढ़ा किसान अपने चार बेटों के आपसी झगड़ों से बहुत दुखी रहता था। वे चारों ताकतवर तो थे, लेकिन छोटी-छोटी बातों पर एक-दूसरे के दुश्मन बने रहते थे।
जब हरमीत बहुत बीमार था, तो उसे चिंता हुई कि उसके मर जाने के बाद दुनिया उसके बेटों को बर्बाद कर देगी। उसने चारों को पास बुलाया और लकड़ियों का एक बं
धा हुआ गट्ठर देकर कहा, “इसे बिना खोले तोड़कर दिखाओ।”
बेटों ने पूरी ताकत लगाई, पसीना बहाया, पर गट्ठर नहीं टूटा। फिर पिता ने गट्ठर खुलवाया और उन्हें एक-एक लकड़ी तोड़ने को कहा। इस बार बेटों ने बड़ी आसानी से सारी लकड़ियाँ तोड़ दीं।
रामदीन ने काँपते हुए स्वर में समझाया, “मेरे बच्चो! यदि तुम अलग-अलग रहोगे, तो इन अकेली लकड़ियों की तरह दुनिया तुम्हें आसानी से तोड़ देगी। लेकिन यदि तुम इस गट्ठर की तरह मिल-जुलकर रहोगे, तो कोई तुम्हें हरा नहीं पाएगा।”
पिता की यह सीख बेटों के दिल में उतर गई। उन्होंने उसी पल पुरानी नफरत भुलाकर हमेशा एक साथ रहने का वचन दिया।
सीख: एकता में ही असीम शक्ति है।
शिक्षा:- एकता में बल है ।
Good work i love it
लकड़ी के गट्टे की भाँति इकटे रहो। यदि तुम
Ek hor mistake yaha par ekathae hai na ke ekte ok sahi kar lu bar bar nhi khahu ge
thanks…ab dekhen teek hai.. yadi kahi or bhi miskate hai tp plz batyen hu theek kare lenge ..