10th Hindi CWSN अनुच्छेद लेखन

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अनुच्छेद-लेखन (Paragraph Writing)

अनुच्छेद-लेखन

मेरी दिनचर्या

मेरा स्कूल सुबह आठ बजे लगता है, किंतु मैं सुबह पाँच बजे उठकर पहले अपने पिता जी के साथ सैर को जाता हूँ। कुछ व्यायाम भी करता हूँ। सुबह नाश्ता करके मैं स्कूल चला जाता हूँ। स्कूल से छुट्टी के बाद खाना खाकर मैं पहले थोड़ी देर आराम करता हूँ। मैं शाम को एक घंटा फुटबॉल खेलता हूँ। मैं खेलने के बाद घर आकर स्कूल से मिले होमवर्क को करता हूँ। फिर खाना खाकर थोड़ी देर सैर भी करता हूँ। मैं रात को सोने से पहले प्रभु का स्मरण करके सो जाता हूँ। इस दिनचर्या से मेरा जीवन नियमित हो गया है।

 

हम घर में सहयोग कैसे करें

हमें घर में मिलजुलकर रहना चाहिए। पिता जी मेहनत से रोज़ी-रोटी कमाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। माँ घर के कार्यों जैसे-साफ-सफाई, खाना बनाना, बर्तन-कपड़े धोना आदि सभी काम करती हैं। इसलिए हमें भी घर के अन्य छोटे-मोटे कार्यों में माता-पिता का हाथ बँटाना चाहिए। हम बाज़ार से दूध, फल, सब्ज़ियाँ आदि लाकर घर में सहयोग दे सकते हैं। घर में उचित जगह पर चीज़ों को रखकर, खाना परोसकर, खाने के बाद खाने के टेबल से बर्तन उठाकर रसोईघर में रखकर हम घर में एक दूसरे को सहयोग दे सकते हैं। इस प्रकार आपसी सहयोग से घर खुशहाल बन जाएगा।

गाँव का खेल मेला

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हमारे गाँव किशनपुरा में वार्षिक खेल मेले का आयोजन किया गया। इन खेलों में ऊँची कूद, साइकिल दौड़, 100 मीटर, 200 मीटर, कबड्डी, कुश्ती तथा बैलगाड़ियों की दौड़ को शामिल किया गया। कुश्ती व कबड्डी के खेल ने तो सभी गाँववासियों का मनोरंजन किया। खेलों के अंतिम दिन बैलगाड़ियों की दौड़ ने भी सभी का खूब मनोरंजन किया। इसके बाद ‘भंगड़े’ ने लोगों को नाचने पर मजबूर कर दिया। अतिथि द्वारा जीतने वाले खिलाड़ियों को इनाम बाँटे गये।

 

भ्रमण: ज्ञान वृद्धि का साधन

भ्रमण आनंद के साथ-साथ ज्ञान वृद्धि का अनुपम साधन है। भ्रमण का महत्त्व इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पुस्तकों आदि में जो ज्ञान दिया गया है वह इतिहासकारों, विद्वानों, वैज्ञानिकों, खोजकर्ताओं व महापुरुषों के भ्रमण का ही परिणाम है। ऐतिहासिक व धार्मिक स्थानों का भ्रमण करके जो मन को शांति, सौंदर्यानुभूति व ज्ञान मिलता है वह केवल किताबें पढ़ने पर नहीं हो सकता। इस प्रकार ऊँचे-ऊँचे पर्वतों, नदियों, झीलों, झरनों, वनों, समुद्रों आदि पर भ्रमण करके ही प्राकृतिक सुंदरता का आनंद व ज्ञान लिया जा सकता है। निस्संदेह, भ्रमण के बिना तो ज्ञान अधूरा ही कहा जाएगा।

 

प्रकृति का वरदान : पेड़-पौधे

पेड़-पौधे हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। पेड़ दुर्गंध लेते हैं और सुगंध लौटाते हैं अर्थात ये कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करके हमें ऑक्सीजन देते हैं। ये सूर्य की गर्मी को स्वयं सहन करके हमें छाया प्रदान करते हैं, इसलिए ये परोपकारी हैं। इनसे हमें फल और फूल, ईंधन, गोंद, रबड़, फर्नीचर की लकड़ी, कागज़ आदि मिलते हैं। पेड़ों के पत्तों, जड़ों, फलों, फूलों तथा छाल आदि से कई प्रकार की दवाइयाँ बनती हैं। तुलसी, पीपल, केला, बरगद, आम आदि। पेड़ों का सम्बन्ध रोज़गार से भी जुड़ा है। पेड़ों से लोग टोकरियाँ, बैग, चटाइयाँ, पेंसिलें, फर्नीचर आदि बनाकर अपना रोज़गार करते हैं। अत: पेड़-पौधों का इतना महत्त्व होने पर इनका संरक्षण करना चाहिए।

 

अपने नये घर में प्रवेश

पिछले सप्ताह नया घर बनकर तैयार हो गया था। नए घर के अनुरूप नए पर्दे, नया फर्नीचर खरीदना स्वाभाविक ही था। मेरे पिता जी ने मेरे और मेरी बहन के लिए पढ़ाई करने का एक कमरा अलग से बनवाया था। उन्होंने हमारे पढ़ने वाले कमरे के लिए स्टडी टेबल, कुर्सियाँ और दो छोटी-छोटी अलमारियाँ बनवाई थीं। उस घर में प्रवेश करने के लिए घर का प्रत्येक सदस्य उत्सुक था। नए स्टडी रूम की बात सोचकर तो मैं रोमाँचकारी हो जाता था। रविवार को ठीक आठ बजे पूजा शुरू हो गयी। पूजा में सभी शामिल हुए। पिता जी ने पूजा के बाद दोपहर के भोजन का बढ़िया प्रबंध किया हुआ था। सभी ने भोजन किया और हमें नए घर में प्रवेश पर बहुत-बहुत बधाइयाँ दीं।

 

विद्यार्थी और अनुशासन

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का बहुत महत्त्व है। विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन की नींव है। आज के विद्यार्थी कल के नेता हैं। विद्यार्थी को श्रेणियों में पास होने पर डिग्रियाँ देने से ही शिक्षा पूर्ण नहीं हो जाती अपितु इनके साथ-साथ विद्यार्थी को अनुशासित बनाना भी शिक्षा का उद्देश्य है। उनमें अनुशासन को इस तरह विकसित करना चाहिए कि वे उसे जीवन का अभिन्न अंग मानें। विद्यालय के नियमों का पालन करना, कक्षा में शांतिपूर्वक बैठकर अध्यापकों द्वारा पढ़ाए जा रहे पाठ को ध्यानपूर्वक सुनना, समय का सदुपयोग करना, पुस्तकालय में चुपचाप बैठकर पढ़ना आदि बातें विद्यार्थी के अनुशासन पालन के अंतर्गत आती हैं।

 

मैंने लोहड़ी का त्योहार कैसे मनाया?

हमने लोहड़ी से तीन-चार दिन पहले ही लोहड़ी की तैयारियाँ शुरू कर दीं। सभी ने कोई न कोई ज़िम्मेवारी ली। कुछ मित्र लकड़ियाँ और उपले खरीदने चले गये तो कुछ तिल, रेवड़ियाँ, गचक, मूँगफली खरीदने चले गये। मैंने सभी के लिए कॉफी का प्रबंध किया। लोहड़ी वाले दिन शाम को लकड़ियों का ढेर बनाकर उनमें अग्नि प्रज्वलित की गयी। सभी ने उन जलती हुई लकड़ियों की परिक्रमा की तथा माथा टेका। चारों ओर एकता तथा भाईचारे का वातावरण बन गया था। हमने सभी को मूँगफली, गचक, रेवड़ियाँ और कॉफी दी। इतने में ढोल वाले ने ढोल बजाना शुरू कर दिया। सभी लड़कों ने भंगड़ा डाला। मुहल्ले के लोग हमारे द्वारा किए गए प्रबंध से बहुत खुश थे। सचमुच, मुझे अपने मुहल्ले के सभी लोगों द्वारा एक साथ मिलकर लोहड़ी मनाना आज भी याद है।

 

एक आदर्श विद्यार्थी के गुण

एक आदर्श विद्यार्थी वह होता है जो सुबह जल्दी उठता है। वह प्रात:काल उठकर नित्य सैर करता है तथा नियमित व्यायाम करता है। वह ईश्वर का ध्यान करता है। वह नहा धोकर स्वच्छ वर्दी पहनकर नियमित रूप से एवं समय पर स्कूल जाता है। वह स्कूल के नियमों का मन से पालन करता है। वह हर कार्य निष्ठापूर्वक करता है। पुस्तकालय हो, कक्षा का कमरा हो, विज्ञानशाला हो या फिर खेल का मैदान हो, वह हर जगह अनुशासनबद्ध रहता है। उसके अपने सहपाठियों के साथ मधुर सम्बन्ध होते हैं। एक आदर्श विद्यार्थी पढ़ाई में कमज़ोर सहपाठियों की सहायता करता है। उसका हर कदम स्कूल के विकास की ओर बढ़ता है। एक आदर्श विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ खेलों और सांस्कृतिक कार्यों में भी रुचि लेता है। इन सभी गुणों के कारण वह स्कूल में लोकप्रिय होता है।

 

जीवन में परिश्रम का महत्व

प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए परिश्रम की आवश्यकता है। परिश्रम के बल पर व्यक्ति प्रगति के शिखर पर पहुँचने में सफल हो सकता है। जो व्यक्ति परिश्रम न करके भाग्य के सहारे बैठे रहते हैं, वे कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते और वे सभी सुख भोगने से वंचित रह जाते हैं। परिश्रम के बल पर तो व्यक्ति अपने भाग्य को भी बदल सकता है। परिश्रमी व्यक्ति निरंतर सफलता की सीढ़ी पर बढ़ता चला जाता है जबकि आलसी व्यक्ति सदैव असफलता और निराशा का भागी बनता है। अत: हमें सदैव परिश्रम को ही सफलता की कुंजी मानकर उसका दामन थाम लेना चाहिए। इससे हम जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करते हुए सफलता रूपी अमृत रस का पान कर सकते हैं।

 

सब्ज़ी मंडी में सब्ज़ी खरीदने का मेरा पहला अनुभव

एक दिन मेरी माँ ने मुझे सब्ज़ी मंडी में सब्ज़ी खरीदने भेजा। सबसे पहले मैंने एक रेहड़ी से कद्दू, घिया, टमाटर और खीरे खरीदे। इसके बाद मैंने दूसरी रेहड़ी से करेले, भिंडी और शिमला मिर्च खरीदी। जब मैं इस सामान को अपने थैले में डालने लगा तभी मैंने देखा कि जो टमाटर मैंने पहले रेहड़ी वाले से खरीदे थे, वे थैले में नहीं थे। मुझे याद आया कि टमाटर तो मैं उसी रेहड़ी वाले के पास भूल आया। मैं तुरंत उस रेहड़ी वाले के पास गया और रेहड़ी वाले ने मुझे वो टमाटरों वाला लिफाफा दे दिया। उस रेहड़ी वाले की ईमानदारी पर मुझे खुशी हुई। इसके बाद मैंने सेब, पपीता और लीची आदि फल खरीदे और वापिस घर को आ गया। सचमुच, मुझे सब्ज़ी खरीदना बहुत अच्छा लगा।

 

जब मुझे स्कूल के खेल-मैदान से बटुआ मिला

एक दिन स्कूल की आधी छुट्टी के समय मैं खेलते-खेलते मेरी नज़र एक बटुए पर पड़ी। मैंने उस बटुए को खोलकर देखा कि उसमें 500 रुपये थे। मैंने यह बात अपने साथियों को बताई। मेरे साथी कहने लगे कि चलो आज जी भरकर मौज मस्ती करेंगे। किंतु मुझे उनका यह विचार तनिक भी अच्छा नहीं लगा। मैं तुरंत अपने कक्षा अध्यापक के पास गया और उन्हें सारी बात बता दी और बटुआ उन्हें दे दिया। मुझे उन्होंने शाबाशी दी। अगले दिन प्रात:कालीन सभा में इसकी घोषणा की गयी। तभी एक विद्यार्थी मंच पर आया और उसने कहा कि कल मेरा बटुआ गुम हो गया था। उसके द्वारा पहचान बताने पर मेरे कक्षा अध्यापक ने उसे उसका बटुआ दे दिया। कक्षा अध्यापक ने सबके सामने मुझे शाबाशी दी। सब विद्यार्थियों ने तालियों से मेरा अभिनंदन किया। मेरा मन फूला न समा रहा था।

 

परीक्षा से एक घंटा पूर्व

आज मेरी वार्षिक परीक्षा का पहला दिन था। जब मैं परीक्षा भवन पहुँचा तो परीक्षा शुरू होने में एक घंटा शेष था। मुझे वहाँ अपनी दो सहेलियाँ मिल गयीं जो कि परीक्षा को लेकर बहुत चिंतित लग रही थीं। मैंने उन्हें पुस्तक छोड़कर महत्त्वपूर्ण विषयों के मुख्य बिन्दुओं पर चर्चा करने की सलाह दी। इससे उनकी पेपर सम्बन्धी सारी परेशानी तो दूर हो गयी और वे अब निश्चित नज़र आने लगीं। इतने में सूचना पट्ट पर परीक्षा हाल में बैठने की योजना चिपका दी गयी। सूचना-पट्ट से हमने परीक्षा भवन में बैठने के लिए अपना निर्धारित स्थान देख लिया। उसी समय परीक्षा भवन में प्रवेश करने की घंटी बज गयी। हम सब परीक्षा भवन में दाखिल हो गये। मैं अपने निर्धारित स्थान पर बैठकर प्रश्न पत्र की प्रतीक्षा करने लगा।

 

खुशियाँ और उमंग लाते हैं जीवन में त्योहार

भारत देश तो त्योहारों का देश है। कुछ त्योहार किसी समुदाय विशेष द्वारा ही मनाये जाते हैं, कुछ किसी क्षेत्र विशेष में मनाये जाते हैं और कुछ भारत भर में मनाए जाते हैं। लोहड़ी, होली, वैशाखी, रक्षा बंधन, जन्माष्टमी, दशहरा, दीवाली, ईद, क्रिसमस आदि धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक तथा गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती आदि राष्ट्रीय त्योहार बड़ी ही धूमधाम, श्रद्धा व उत्साह से मनाए जाते हैं। सभी त्योहार एक नयी उमंग, जोश लेकर आते हैं और जनमानस पर अपना गहरा प्रभाव डालते हैं। ये आपसी भाईचारे, सद्भावना, प्रेम व एकता के साथ-साथ देशभक्ति की भावना को भी विकसित करते हैं। सभी की तरह मुझे भी त्योहारों का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।

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