पाठ 18: श्री मन्नारायण (निबंध: समय नहीं मिला)

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पाठ 18: श्री मन्नारायण

(निबंध: समय नहीं मिला)

() लगभग 60 शब्दों में उत्तर दें

प्रश्न 1. लेखक के अनुसार कौन से लोग बड़े हैं?

उत्तर: लेखक का अनुभव है कि जो लोग वास्तव में बड़े हैं और बहुत व्यस्त रहते हैं, उनका पत्र व्यवहार भी बहुत व्यवस्थित रहता है ये वे लोग हैं जो समय का सदुपयोग करते हैं और हर रोज़ का काम उसी दिन समय पर निपटाते हैं लेखक के अनुसार, ये लोग अपनी कमज़ोरी और अनियमितता को छिपाने के लिए समय नहीं मिलाका बहाना कभी नहीं बनाते

प्रश्न 2. भारत और विदेश में समय की पाबंदी के संदर्भ में लेखक ने क्या विचार व्यक्त किए हैं?

उत्तर: लेखक के अनुसार, भारत में समय की पाबंदी के मामले में बड़ी गैरपाबंदी (लापरवाही) है, जहाँ सभाएँ भी ठीक समय पर शुरू नहीं होतीं इसके विपरीत, इंग्लैंड और यूरोप के देशों में सभाएँ समय पर शुरू होती हैं हालांकि, विदेशों में भी लोग सिनेमा या मैच के टिकट के लिए लंबी कतारों में खड़े रहकर समय बर्बाद करते हैं

प्रश्न 3. विदेशों में लोग समय को किस प्रकार बर्बाद करते हैं?

उत्तर: विदेशों में लोग लंबीलंबी कतारों (लाइनों) में खड़े रहकर अपना समय बर्बाद करते हैं उदाहरण के लिए, वे सिनेमा, थिएटर या फुटबॉल मैच के टिकट लेने के लिए दोदो, तीनतीन घंटे लगातार खड़े रहते हैं कई बार तो इतने घंटे खड़े रहने के बाद भी उन्हें टिकट नहीं मिल पाता और उन्हें वापस लौटना पड़ता है

प्रश्न 4. इस निबंध से आपको क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर: इस निबंध से हमें यह शिक्षा मिलती है कि समय धन से भी कहीं ज़्यादा अहम् (महत्वपूर्ण) हैहमें अपनी कमज़ोरी छिपाने के लिए समय नहीं मिलाका बहाना नहीं बनाना चाहिए, बल्कि समय का सदुपयोग करना चाहिए साथ ही, हमें मशीन की तरह कठोर बनकर, जीवन में थोड़ी लचक (लचीलापन) रखनी चाहिए ताकि हम दूसरों के साथ खुशमिज़ाजी से रह सकें

प्रश्न 5. लेखक ने समय के सदुपयोग के लिए क्या सुझाव दिया है?

उत्तर: लेखक ने सुझाव दिया है कि हमें अपने समय का पूरा फ़ायदा उठाना चाहिए और एक मिनट भी बर्बाद नहीं करना चाहिए हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि हमें मशीन की तरह कठोर नहीं बनना चाहिए और घड़ी के टोकों के साथ अपनी ज़िंदगी की ताल नहीं बैठानी चाहिएहमें अपने जीवन में थोड़ी लचक (लचीलापन) रखना चाहिए और खुशमिज़ाजी से समय का उपयोग करना चाहिए

() लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें

प्रश्न 6. ‘समय नहीं मिलानिबंध का सार अपने शब्दों में लिखें

उत्तर: श्री मन्नारायण द्वारा लिखित निबंध समय नहीं मिलाउन लोगों पर व्यंग्य करता है जो अपनी अनियमितता, आलस्य और निकम्मेपन को छिपाने के लिए हमेशा यह बहाना बनाते हैं कि उन्हें काम पूरा करने के लिए समय नहीं मिला लेखक कहते हैं कि यह बहाना बनाना अपनी कमजोरी को छिपाना है, जिसे शर्म समझनी चाहिए

लेखक ने समय के महत्व को धन से भी ऊपर रखा है वे तर्क देते हैं कि धन की दुनिया में अमीर और गरीब का फर्क है, लेकिन समय के साम्राज्य में सब बराबर हैंयह एक आदर्श लोकतंत्र है डॉ. जॉनसन का उदाहरण देते हुए वे सिद्ध करते हैं कि व्यस्तता के बाद भी हर व्यक्ति के पास पर्याप्त समय बचता है, जिसका उपयोग किया जा सकता है लेखक भारत और विदेशों में समय की पाबंदी की तुलना करते हैं अंत में, लेखक सलाह देते हैं कि हमें अपने समय का पूरा फ़ायदा उठाना चाहिए, पर हमें मशीन जैसा कठोर नहीं बनना चाहिए, बल्कि खुशमिज़ाजी के साथ जीवन जीना चाहिए

प्रश्न 7. ‘समय धन से भी कहीं ज़्यादा अहम् चीज़ है‘ – लेखक के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर: लेखक श्री मन्नारायण के इस कथन से पूरी तरह सहमत हुआ जा सकता है कि समय धन से कहीं ज़्यादा अहम् (महत्वपूर्ण) चीज़ है धन को मेहनत से और अधिक कमाया जा सकता है, और धन की मात्रा में निरंतर वृद्धि संभव है लेकिन समय के मामले में ऐसा नहीं है; समय बीत जाने पर वापस नहीं आता

लेखक का मुख्य तर्क यह है कि धनवान और निर्धन के बीच धन की दुनिया में बड़ा फर्क होता है, लेकिन समय के निज़ाम (व्यवस्था) में कोई ऊँचनीच का भेदभाव नहीं हैचाहे कोई अमीर हो या गरीब, बादशाह हो या कंगाल, हर किसी को एक दिन में समान रूप से 24 घंटे ही मिलते हैं लेखक इसी समानता के कारण समय के साम्राज्य को आदर्श लोकतंत्र कहते हैं यह समानता समय को धन से कहीं ज़्यादा कीमती और न्यायसंगत बनाती है

() सप्रसंग व्याख्या करें

प्रश्न 1. “मेरा तो यह भी अनुभव है कि जो लोग सचमुच बड़े हैं और बहुत व्यस्त रहते हैं उनका पत्र व्यवहार भी बहुत व्यवस्थित रहता है

प्रसंग: यह गद्यांश (गद्य की विधा: निबंध) हिंदी पुस्तक 12′ से संकलित समय नहीं मिला नामक निबंध से लिया गया है इस निबंध के लेखक श्री मन्नारायण हैं इस पंक्ति में लेखक उन लोगों के बहाने पर व्यंग्य कर रहे हैं जो व्यस्तता का झूठा प्रदर्शन करते हैं, जबकि वे लोग जो वास्तव में सफल हैं, समय का सदुपयोग करते हैं

व्याख्या: लेखक उन लोगों के व्यवहार पर टिप्पणी करते हैं जो हमेशा समय नहीं मिलाका बहाना बनाकर अपनी आलस्य और अव्यवस्था को छिपाते हैं लेखक का व्यक्तिगत अनुभव यह है कि जो लोग सचमुच बड़े (सफल) और व्यस्त होते हैं, वे समय का मूल्य समझते हैं इसलिए उनका जीवन और कार्य, विशेषकर पत्र व्यवहार, बहुत व्यवस्थित होता है वे अपने हर रोज़ के काम को उसी दिन निपटा देते हैं इसका तात्पर्य है कि समय मिलने का बहाना बनाना सफलता की नहीं, बल्कि कमजोरी की निशानी है

प्रश्न 2. “धन की दुनिया में अमीर गरीब, बादशाहकंगाल का फर्क है पर खुशकिस्मती से समय के साम्राज्य में ऊंचनीच का भेदभाव नहीं है वक्त के निजाम में सब बराबर हैं, उसमें आदर्श लोकतंत्र है

प्रसंग: यह गद्यांश हिंदी पुस्तक 12′ से संकलित समय नहीं मिला नामक निबंध से लिया गया है इस निबंध के लेखक श्री मन्नारायण हैं लेखक यहाँ समय को धन से अधिक महत्व देते हुए, समय की सर्वव्यापी समानता का वर्णन कर रहे हैं

व्याख्या: लेखक तुलना करते हैं कि धनसंपत्ति के मामले में समाज में अमीर, गरीब, बादशाह और कंगाल के बीच स्पष्ट रूप से बड़ा फर्क होता है लेकिन लेखक इसे मनुष्य की खुशकिस्मती मानते हैं कि समय के साम्राज्य (वक्त के निज़ाम) में ऐसा कोई भेदभाव नहीं है समय सबको समान रूप से मिलता है चाहे कोई कितना भी धनी हो, वह अपने जीवन में एक मिनट भी बढ़ा नहीं सकता चूंकि समय के बंटवारे में सभी बराबर हैं, इसलिए लेखक समय की व्यवस्था को आदर्श लोकतंत्र कहते हैं

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